वरुणा नदी के डूब क्षेत्र में कराए गए अवैध निर्माणों की सूची में शहर के दर्जन भर बड़े होटल शामिल हैं। अवैध निर्माणों की सूची ऑनलाइन होने के साथ ही होटल संचालकों समेत इसके दायरे में आने वाले अवैध निर्माणकर्ताओं में हड़कंप मच गया है। नए सिरे से कराए गए सर्वे और सीमांकन में वीडीए, राजस्व विभाग, नगर निगम और सिंचाई विभाग की संयुक्त टीम ने 762 अवैध निर्माणों को चिह्नित किया है, जिनकी सूची शासन के निर्देश पर वीडीए ने अपनी वेबसाइट पर ऑनलाइन की है। अब शासन की हरी झंडी मिलते ही अवैध निर्माणों के खिलाफ कार्रवाई का अभियान शुरू करा दिया जाएगा।
वरुणा कॉरिडोर के सीएम का ड्रीम प्रोजेक्ट होने के नाते उच्चाधिकारी पूरी तैयारी के साथ कदम दर कदम आगे बढ़ रहे हैं। माना यही जा रहा है कि अवैध निर्माणों पर कोई रियायत नहीं मिलने वाली। वरुणा के दोनों किनारों पर 50-50 मीटर क्षेत्र को डूब क्षेत्र घोषित करते हुए वहां ग्रीन बेल्ट के विकास के लिए बोर्ड भी लगवाए जा चुके हैं। शासन से निर्देश मिलने के बाद वीडीए भवन स्वामियों को नोटिस भेजेगा। फिर भवन स्वामियों का पक्ष जाना जाएगा और उसके बाद कार्रवाई होगी।
ऑनलाइन सूची में कैंटोमेंट क्षेत्र के रमाडा, नेपाली कोठी, सूर्या, होटल ताज समेत एक दर्जन होटलों के नाम हैं। इनके अलावा, पीडब्ल्यूडी डिप्लोमा संघ का दफ्तर, पूर्व विधायक राबिया कलाम का घर भी शामिल है। गौरतलब है कि शुरुआती दौर में वीडीए ने एक होटल को चिह्नित कर थोड़ी बहुत कार्रवाई करने के बाद मामला ठंडे बस्ते में डाल दिया था। ‘अमर उजाला’ में वरुणा किनारे अवैध निर्माणों की खबरें प्रकाशित होने के बाद नए सिरे से सर्वे कराया गया तो डूब क्षेत्रों में बड़े पैमाने पर अवैध निर्माणों की असलियत सामने आई। उधर, वरुणा किनारे के बाशिंदों ने वीडीए की कार्रवाई के खिलाफ सोमवार को विरोध मार्च निकालने का निर्णय लिया है।
मुख्यमंत्री के ड्रीम प्रोजेक्ट वरुणा कॉरिडोर के निर्माण में तेजी लाते हुए सिंचाई विभाग और वीडीए ने मजदूरों की तादाद बढ़ा दी है। मौजूदा समय करीब डेढ़ हजार मजदूरों को यहां काम पर लगाया गया है। यह तेजी मुख्यमंत्री अखिलेश यादव के आगमन के मद्देनजर बताई जा रही है। नौ जून को सीएम वाराणसी आगमन के दौरान कॉरिडोर की अब तक प्रगति के बारे में जानकारी करेंगे। कैंटोनमेंट से सरायमोहाना आदिकेशव घाट तक तकरीबन 11 किमी लंबी वरुणा नदी के दोनों किनारों को पर्यटन के लिहाज से कॉरिडोर के रूप में विकसित करना है। साथ ही, वरुणा के संरक्षण और बचाव के लिए भी सीएम की इस पहल को बेहद कारगर बताया जा रहा है।