यूपी के जौनपुर के सिरकोनी के परियावा (लौकरी) गांव की मौर्या बस्ती में शनिवार सुबह 300 मीटर रास्ते के विवाद पर दिनेश मौर्या (35) ने अपने ऊपर पेट्रोल डालकर आग लगा ली। आग का गोला बनने के बाद वह जमीन पर लेट गया।
आसपास के लोगों ने बोरे और पानी डालकर आग बुझाई और उसे जिला अस्पताल पहुंचाया। पीड़ित ने पुलिस प्रशासन पर गंभीर आरोप लगाया, जिसे गंभीरता से लेते हुए डीएम सैमुअल पॉल एन ने जांच के आदेश दिए हैं।
जिलाधिकारी ने बताया कि दिनेश मौर्य के खुद को आग लगाने के प्रयास के मामले को जिला प्रशासन ने गंभीरता से लिया है। दिनेश को शनिवार सुबह करीब नौ बजे जिला अस्पताल लाया गया, जहां उनका उपचार शुरू करा दिया गया।
प्रथम दृष्टया वह 40 प्रतिशत झुलसे हैं, लेकिन उनकी हालत खतरे से बाहर है। राजस्व अधिकारी पीड़ित परिवार के संपर्क में हैं। तहसीलदार, नायब तहसीलदार, कानूनगो और लेखपाल को मौके पर भेजा गया है। जिला प्रशासन पूरी तरह से पीड़ित परिवार के साथ है।
घटना की जानकारी मिलने पर एसडीएम सदर और सीओ सिटी भी गांव पहुंचे और विवाद के बारे में जानकारी ली। सीओ सिटी आईपीएस सम्यक चौधरी ने बताया कि युवक ने किन परिस्थितियों में आग लगाई, इसकी जांच की जा रही है। युवक का अस्पताल में इलाज चल रहा है।
पीड़ित का आरोप: जबरन करा रहे थे निर्माण, पुलिस ने पत्नी और बच्चों के साथ किया अभद्र व्यवहार
पीड़ित दिनेश कुमार मौर्या के मुताबिक, वह अपनी सगी बहन का इलाज कराने के लिए बीएचयू में थे। शनिवार सुबह उनकी निजी जमीन पर पड़ोसी जबरन सड़क निर्माण कराने का प्रयास कर रहे थे। इस मामले में करीब एक सप्ताह पहले ग्राम प्रधान, ग्रामीणों और पुलिस की मौजूदगी में पंचायत हुई थी।
दिनेश के अनुसार, शुक्रवार को उनके बीएचयू में रहने के दौरान ग्राम प्रधान ने बिना किसी अंतिम निर्णय के सड़क निर्माण शुरू करा दिया। पत्नी और बेटे लकी ने इसका विरोध किया तो पुलिस बुला ली गई। दिनेश ने आरोप लगाया कि पुलिस ने उनकी पत्नी और बच्चों के साथ अभद्र व्यवहार किया और बेटे के हाथ से वीडियो बना रहे मोबाइल को छीन लिया।
पीड़ित के मुताबिक शनिवार भोर में बीएचयू से लौटने पर दिनेश को सड़क निर्माण की जानकारी हुई। इसके बाद उन्होंने खुद को आग लगा ली। घटना में उनके हाथ, पैर और गर्दन के आसपास गंभीर रूप से जलने की बात सामने आई है।
पीड़ित का आरोप: जबरन करा रहे थे निर्माण, पुलिस ने पत्नी और बच्चों के साथ किया अभद्र व्यवहार
पीड़ित दिनेश कुमार मौर्या के मुताबिक, वह अपनी सगी बहन का इलाज कराने के लिए बीएचयू में थे। शनिवार सुबह उनकी निजी जमीन पर पड़ोसी जबरन सड़क निर्माण कराने का प्रयास कर रहे थे। इस मामले में करीब एक सप्ताह पहले ग्राम प्रधान, ग्रामीणों और पुलिस की मौजूदगी में पंचायत हुई थी।
दिनेश के अनुसार, शुक्रवार को उनके बीएचयू में रहने के दौरान ग्राम प्रधान ने बिना किसी अंतिम निर्णय के सड़क निर्माण शुरू करा दिया। पत्नी और बेटे लकी ने इसका विरोध किया तो पुलिस बुला ली गई। दिनेश ने आरोप लगाया कि पुलिस ने उनकी पत्नी और बच्चों के साथ अभद्र व्यवहार किया और बेटे के हाथ से वीडियो बना रहे मोबाइल को छीन लिया।
पीड़ित के मुताबिक शनिवार भोर में बीएचयू से लौटने पर दिनेश को सड़क निर्माण की जानकारी हुई। इसके बाद उन्होंने खुद को आग लगा ली। घटना में उनके हाथ, पैर और गर्दन के आसपास गंभीर रूप से जलने की बात सामने आई है।
राजस्व अभिलेखों में सरकारी रास्ता दर्ज नहीं
जिलाधिकारी ने बताया कि राजस्व अभिलेखों और नक्शे के अनुसार वहां पर कोई सरकारी रास्ता दर्ज नहीं है। वह भूमि काश्तकार/भूमिधर की है। आपसी सहमति के आधार पर ही प्रधान द्वारा कार्य प्रारंभ किया गया था। बाद में निर्माण शुरू होने पर संभवतः उनकी भूमिधरी प्रभावित होने के कारण उन्होंने कार्य रोकने का प्रयास किया, जिसे प्रधान द्वारा नहीं माना गया।
14 को गांव के संभ्रांतजनों की बैठक हुई थी, जिसमें मैं वहां गया था। दिनेश मौर्य की शतों के अनुसार ही काम शुरू कराया गया था। 16 को रास्ता बनाने का काम शुरू हुआ लेकिन, शाम को उन्होंने ही पुलिस बुला ली। इसके बाद काम रोक दिया गया। एसपी मानव, ग्राम प्रधान।