जन्माष्टमी पर कान्हा के शृंगार के साथ झांकी सजाने के लिए दुकानें सज चुकी हैं। मथुरा, वृंदावन, और गोकुलधाम में मिलने वाले शृंगार सामग्री व पोशाक अब शहर में भी उपलब्ध है। सोने सा दिखने वाले सिंहासन मखमली अंगवस्त्र से नजर हट नहीं रही है।
गृहस्थ 23 को और वैष्णव 24 को रखेंगे व्रत :
रोहिणी च यदा कृष्णे पक्षेष्टम्यां द्विजोत्तम। जयंती नाम सा प्रोक्ता सर्वपापहरातिथि।। भगवान श्रीकृष्ण का जन्म भाद्रपद कृष्ण अष्टमी बुधवार को रोहिणी नक्षत्र में अर्द्धरात्रि के समय वृष के चंद्रमा में हुआ था। 22 अगस्त को अष्टमी रात्रि में तीन 3:16 मिनट से शुक्रवार को 23 अगस्त को 3:18 मिनट तक है।
रोहिणी नक्षत्र शुक्रवार को 23 अगस्त को रात्रि 12:10 मिनट से लगकर 24 अगस्त को रात्रि 12:28 बजे तक है। शुक्रवार को 23 अगस्त को रात्रि में अष्टमी और रोहिणी नक्षत्र का योग बन रहा है। जब मध्य रात्रि में अष्टमी तिथि एवं रोहिणी नक्षत्र का योग बनता है तो सर्वपाप को हरने वाली जयंती योग से युक्त जन्माष्टमी होती है। बीएचयू के ज्योतिषाचार्य पं. गणेश प्रसाद मिश्र के अनुसार जन्माष्टमी के व्रत से पापों का शमन और सुखों की वृद्धि होती है। इस व्रत को सभी बाल, युवा, वृद्ध और नर-नारी कर सकते हैं।