प्रबंधन के स्पष्टीकरण में पाया गया कि 1998 में आलिया स्तर की स्थायी मान्यता फर्जी दानपत्र के आधार पर प्राप्त की थी। यह दानपत्र 20 जून 1997 का बताया गया था। इसमें भूमि तहसील मोहम्मदाबाद गोहना, जनपद आजमगढ़ में अंकित थी।
हालांकि, वर्ष 1988 में ही मऊ जनपद का गठन हो चुका था। मोहम्मदाबाद गोहना तब मऊ जिले का हिस्सा था, जिससे दानपत्र संदिग्ध हो गया। परिषद ने प्रबंधन को अपना पक्ष रखने के कई अवसर दिए, लेकिन उपलब्ध कराए गए जवाब संतोषजनक नहीं पाए गए। मदरसा शिक्षा परिषद की रजिस्ट्रार अंजना सिरोही ने दोषियों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज कराने का आदेश जिला अल्पसंख्यक कल्याण अधिकारी को दिया था।
जिला अल्पसंख्यक कल्याण अधिकारी ने प्राथमिकी किसके खिलाफ दर्ज करानी है, इस संबंध में रजिस्ट्रार से मार्गदर्शन मांगा था। रजिस्ट्रार की ओर से मार्गदर्शन मिलने के बाद उन्होंने पूर्व और वर्तमान प्रबंध समिति की सूची निकलवाई। इस सूची में 22 नाम दर्ज पाए गए।
इनमें से 11 नाम पहली सूची में शामिल थे, जबकि पांच नए लोगों के नाम दूसरी सूची में शामिल किए गए हैं। जिला अल्पसंख्यक कल्याण अधिकारी के निर्देश पर पटल सहायक आमिर हुसैन ने मुबारकपुर थाने में प्राथमिकी दर्ज करने के लिए तहरीर दी है।
इस सूची में एक नाम ऐसा है जो झारखंड के जामताड़ा जनपद के जिला जज का भी है, जबकि वह 2002 से ही जिले के बाहर नौकरी कर रहे हैं और उन्हें इसके बारे में जानकारी तक नहीं है। जानकारी होने पर उन्होंने जिले के अधिकारियों को इस संबंध में पत्र भी भेजा है।
1998 की प्रबंधकीय सूची
सदर अलहाज अफी अहमद, नायब सदर मो. तारिक, प्रबंधक व सचिव जहीन अहमद, नायब सचिव शहनवाज आलम, खजांची मो. हामिद, ऑडिटर रिजवान अहमद, सदस्य अल्ताफ हुसैन, सदस्य मेराज अहमद, सदस्य एहसानुल हक, सदस्य फहीम अहमद, सदस्य रजीउद्दीन।
2024-25 की प्रबंधकीय सूची
सदर अहमदुल्ला, नायब सदर मो. साकिब, प्रबंधक व सचिव जहीन अहमद, उपसचिव शहनवाज आलम, खजांची मो. हामिद, ऑडिटर रिजवान अहमद, सदस्य शगुफ्ता बानो, सदस्य नेहाल अहमद, सदस्य मो. आदिब, सदस्य सैयद राहिल हुसैन, सदस्य फहीम अहमद।
हमें इस मामले की कोई जानकारी नहीं है। हम तो 2002 से ही एडीजे पद पर चयनित होकर जिले से बाहर नौकरी कर रहे हैं। हमें इसकी जानकारी हुई है कि जहीन अहमद जो हमारे दूर के रिश्तेदार हैं, उन्होंने हमारा नाम मदरसे की प्रबंध समिति में डाल दिया है। सबसे बड़ी बात तो यह है कि जब हमने अपना आधार कार्ड, पैन कार्ड, वोटर आईडी आदि किसी को नहीं दिया तो फिर सोसायटी का रजिस्ट्रेशन करने वाले ने इसे बिना देखे कैसे कर दिया। मैंने इस संबंध में मदरसा शिक्षा परिषद की रजिस्ट्रार, एसपी आजमगढ़ और जिला अल्पसंख्यक कल्याण अधिकारी को पत्र भेजा है। अब देखते हैं उनकी ओर से क्या कार्रवाई की जाती है। - रिजवान अहमद, जिला जज जामताड़ा, झारखंड।
रजिस्ट्रार का निर्देश मिला था। निर्देश के तहत हमने चिटफंड कार्यालय से समिति के दस्तावेज से प्रबंध समिति में शामिल लोगों के नाम लिए हैं। उनके खिलाफ प्राथमिकी दर्ज करने के लिए मुबारकपुर थाने में तहरीर दे दी गई है। हालांकि अभी तक प्राथमिकी दर्ज नहीं हुई है। - वर्षा अग्रवाल, जिला अल्पसंख्यक कल्याण अधिकारी।
हमारे पास अल्पसंख्यक विभाग के पटल सहायक आमिर हुसैन का पत्र मिला है। लेकिन, यह पत्र जांच के लिए है, न कि तहरीर है। - शशिचंद चौधरी, थाना प्रभारी मुबारकपुर।