पं. सिद्धांत शास्त्री सांगानेर ने कहा कि भावों में मृदुता आना, विनयवान होना ही धर्म का आत्मा में प्रवेश होना माना गया है। विनय का अर्थ है समर्पण। बड़ा बनने के लिए समर्पण की आवश्यकता होती है अहंकारी व्यक्ति कभी किसी के सामने झुकता नहीं। बिना झुके किसी वस्तु की प्राप्ति नहीं होती। वह सोमवार की शाम को ऑनलाइन प्रवचन दे रहे थे।
उन्होंने कहा कि नीचे पड़ी वस्तु को उठाना है तो झुकना ही पड़ता है। सम्यक दृष्टि सिर्फ देव शास्त्र गुरु के अलावा किसी के सामने नहीं झुकती। मिथ्या दृष्टि कुगुरु, कुदेव, कुशास्त्र के अलावा किसी के सामने नहीं झुकती। अहंकार से भरा जीवन कांच के प्याले के समान होता है जो टूटने पर बिखर जाता है। अहंकार का त्याग होते ही सम्यक दर्शन को प्राप्त कर चार ज्ञान के धारी गौतम गणधर हो गए। अहंकार को विष समझकर त्याग देना चाहिए। उत्तम गति अर्थात मोक्ष को पाना है तो अहंकार का त्याग कर मृदुता धारण करना ही जीवन की सार्थकता है। हमें दूसरा अध्याय उत्तम धर्म यही सिखाता है। किसी की निंदा न करें, घमंड से दूर रहें, मन को निर्मल रखें।
वहीं दूसरी तरफ प्रात: भगवान पार्श्वनाथ की जन्मस्थली भेलूपुर, भगवान श्री श्रेयांशनाथ जी की जन्म स्थली सारनाथ, नरिया, एवं ग्वाल दास साहू लेन स्थित श्री दिगंबर जैन पंचायती मंदिर में विशेष पूजन अर्चन हुआ। इस वर्ष सभी जैन धर्मावलंबी धर्म के सबसे महत्वपूर्ण आत्म शुद्धि व्रत जप सब कुछ अपने घरों पर ही कर रहे हैं।