जिला कारागार के जेलर मुन्ना बजरंगी गिरोह के शूटरों के निशाने पर हैं। ऐसा इनपुट जरायम से जुड़े लोगों एवं खुफिया एजेंसियों से मिलने के बाद जेलर संजय कुमार सिंह की सुरक्षा बढ़ा दी गई है। एसपी ने हाल ही में जेलर को गनर मुहैया कराया है।
फतेहगढ़ जेल में बंद एक शातिर अपराधी सहित जौनपुर एवं वाराणसी के कुछ लोगों पर शक है कि जेलर एवं एक पूर्व सांसद पर हमला इनके द्वारा कराई जा सकता है। इन्हें शक है कि बागपत में तैनाती के दौरान जेलर ने मुन्ना बजरंगी की हत्या कराने में किसी न किसी रूप में सहयोग किया।
जौनपुर रामपुर थाना क्षेत्र के पुरेदयाल गांव निवासी मुन्ना बजरंगी झांसी की जेल में बंद था। पिछले वर्ष नौ जुलाई 2018 को मुन्ना बजरंगी की बागपत जेल में गोली मारकर हत्या कर दी गई। आरोप जेल में बंद शातिर अपराधी सुनील राठी पर लगा।
मुन्ना बजरंगी की हत्या से पांच दिन पूर्व तत्कालीन बागपत के जेलर संजय कुमार सिंह लखनऊ में एक मीटिंग में गए और मुन्ना बजरंगी की हत्या होने के बाद भी जेल वापस नहीं लौटे।
कुछ दिनों बाद उनका स्थानांतरण जौनपुर कर दिया गया। इसके बाद जौनपुर जेल में बंद बजरंगी गिरोह के कुछ अपराधियों ने जेल में ही उन्हें मारने का प्लान तैयार किया। इसकी भनक जेलर को किसी अन्य जेल के बंदियों के माध्यम से लग गई।
ऐसे में 17 शातिर अपराधियों का प्रशासनिक आधार पर गैर जेल भेजने का प्रस्ताव तैयार कराकर डीएम के पास पत्रावली भेजी गई। लेकिन इसकी मंजूरी डीएम के स्तर से नहीं मिल सकी।
जेल अधिकारियों ने पूरा मामला शासन के संज्ञान में लाया तो शासन ने एक बार में दस, फिर सात एवं एक बंदी को गैर जेल में प्रशासनिक आधार पर ट्रांसफर कर दिया। इन्हीं बंदियों में से कुछ बंदियों ने जौनपुर के स्थानीय कुछ नेताओं, माफियाओं और शातिर बदमाशों से गठजोड़ कर जेलर को सबक सिखाने का मन मनाया है।
कुछ शूटरों को इन्होंने जेलर को मारने की सुपारी भी दी, लेकिन शूटर जेलर की पहचान के निकल आए। उन्होंने जेलर को आगाह कर दिया। हत्या का इनपुट मिलने के बाद जेलर संजय कुमार सिंह ने तत्कालीन एसपी से मुलाकात कर पूरी बात बताई। एसपी ने खुफिया जांच कराई तो मामला सहीं पाया। जेलर के साथ एक पूर्व सांसद पर भी हमले होने की अंदेशे का इनपुट मिला।