जगन्नाथ महोत्सव के दूसरे दिन शुक्रवार को दुर्गाकुंड स्थित इस्कॉन मंदिर में जगन्नाथ कथा में हरिनाम संकीर्तन, दिव्य कथा, छप्पन भोग, महाआरती और प्रसादम कार्यक्रम हुआ। वृंदावन के रमाकांत प्रभु ने कहा कि जगन्नाथ अपने भक्तों से बेहद प्यार करते हैं। ओडिशा में भगवान जगन्नाथ के एक प्रसिद्ध मुस्लिम भक्त सलाबेगा थे। वे अपने भजनों से जगन्नाथ को रिझाते थे। वे भगवान के महान भक्तों में से एक थे। उनकी भक्ति निसंदेह संकीर्ण धार्मिक सीमाओं को पार कर सार्वभौमिक शांति का संदेश देती है। आज भी उनकी भक्ति के गीत पीढ़ियों से गाए जाते हैं। उन्होंने कहा कि जगन्नाथ प्राणनाथ हैं। जिनकी कोई आशा नहीं, उनकी आशा जगन्नाथ होते हैं। इस्कॉन वाराणसी के प्रमुख अच्युत मोहन दास ने कहा कि इस्कॉन के संस्थापक श्रील प्रभुपाद ने भगवान जगन्नाथ की महिमा को पूरी दुनिया में फैलाया। इस अवसर पर भगवान जगन्नाथ बलभद्र और सुभद्रा का विविध द्रव्यों से पूजन व अभिषेक और विविध प्रकार के फूलों से शृंगार हुआ। छप्पन भोग लगा और उनकी महाआरती उतारी गई। पूजा में साक्षी मुरारी दास, रसिक गोविंद दास,राम केशव दास व मुरारी गुप्त दास आदि रहे।