आईयूसीटीई में शिक्षकों का हुआ जुटान।
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इन्हें मिला सम्मान
शिक्षक का कार्य सूचना देना नहीं, जबकि विद्यार्थियों में नैतिकता और मूल्य की शिक्षा से उनमें राष्ट्र प्रेम की भावना का उदय करना होता है। - प्रो. सुभाष चंद्र तिवारी, संविवि
समावर्तन संस्कार में कहा जाता है, जो मेरे अर्थात् गुरु समान सुचरित है जीवन में उन्हीं का अनुकरण करना, कुचरित का नहीं। - प्रो. राम किशोर त्रिपाठी, संविवि
एक शिक्षक में विषय ज्ञान जरूरी है। लेकिन उससे कहीं अधिक विद्यार्थी की जरूरत और उसके बारे में समझ अति आवश्यक है। - प्रो. राजनाथ उपाध्याय, काशी विद्यापीठ
सूचना देने में एआई मददगार सिद्ध हो रही है। लेकिन वह करुणा, क्षमाशीलता के अभाव को भरने में सक्षम नहीं है, इसमें शिक्षक की भूमिका सार्थक हो जाती है। - प्रो. अरविंद कुमार पांडेय, काशी विद्यापीठ
विद्यार्थियों को राष्ट्र, इतिहास के बारे में जानना जरूरी है क्योंकि इसके बारे में विद्यार्थियों को कम जानकारी है। - प्रो. हरींद्र प्रसाद सिंह, बीएचयू
शिक्षक का भी अपना व्यक्तित्व है, उसकी आवश्यकताएं हैं। लेकिन उनकी मर्यादाओं का निर्धारण भी जरूरी है। गुरु में ज्ञान के साथ समझदारी भी जरूरी है। - प्रो. गीता राय, बीएचयू