महर्षि पतंजलि एक महान चिकित्सक भी थे, इन्हें ही दुनिया की पहली डॉक्टरी की किताब चरक संहिता का प्रणेता भी माना जाता है। इन्हें रसायन विद्या का विशिष्ट आचार्य भी माना जाता है। अभ्रक, धातुयोग और लौहशास्त्र महर्षि पतंजलि की ही देन है। इन्होंने महर्षि पाणिनी के अष्टाध्यायी का महाभाष्य भी लिखा है। इसके साथ ही आयुर्वेद के कई ग्रंथों की रचना का श्रेय भी महर्षि पतंजलि को ही जाता है।
महर्षि पतंजलि द्वारा रचित योगसूत्र की लोकप्रियता का अंदाज इसी बात से लगाया जा सकता है कि मध्यकाल में ही इसका तकरीबन 40 भारतीय भाषाओं सहित जावा तथा अरबी भाषा में भी अनुवाद किया गया था। यह महान ग्रंथ 12वीं से 19वीं शताब्दी तक मुख्यधारा से गायब हो चुका था जिसे 19वीं शताब्दी में ब्रिटिश काल के दौरान दोबारा ढूंढा गया और धीरे-धीरे पूरी दुनिया में इसे स्वीकार किया जाने लगा।
वाराणसी के मदनपुरा मोहल्ले की पुराना दुर्गा बाड़ी में योगी श्यामाचरण लाहिड़ी ने डेढ़ सौ साल पहले क्रिया योग को पुनर्जीवित किया। अंग्रेजों की गुलामी के दौर में उन्होंने योग का दीपक जलाया जो आज भी प्रकाशमान है। काशी की विभूतियों पर शोध कर रहे नित्यानंद राय ने बताया कि क्रिया योग ईश्वर बोध, यथार्थ ज्ञान एवं आत्म साक्षात्कार करने की एक वैज्ञानिक प्रणाली है।
श्यामाचरण लाहिणी की कर्मभूमि बनारस थी वे महावतार बाबाजी के शिष्य थे। जब लाहिड़ी महाशय को ब्रिटिश सरकार के लेखाकार के रूप में नौकरी पर रानीखेत तैनात कर दिया गया था। एक दिन रानीखेत से ऊपर दूनागिरी की पहाड़ियों में घूमते समय उन्होंने किसी को अपना नाम पुकारते सुना। आवाज के पीछे-पीछे ऊपर पहाड़ पर चलते हुए उनकी मुलाकात एक ऊंचे कद के तेजस्वी साधु से हुई।
वह यह जानकर चकित थे कि साधु को उनका नाम पता है। यह साधु महावतार बाबाजी थे। फिर उनको क्रिया योग में दीक्षित किया और लाहिड़ी को निर्देश दिया कि वह दूसरों को दीक्षित करना आरंभ करें। लाहिड़ी महाशय के शिष्यो में तीनकोरी लाहिड़ी, स्वामी युक्तेशवर गिरि, पंचानन भट्टाचार्य, स्वामी प्रणवानन्द, स्वामी केवलानंद, स्वामी केशवानंद और भूपेंद्रनाथ सान्याल थे।
बीएचयू के वैदिक विज्ञान केंद्र की ओर से अंतरराष्ट्रीय योग दिवस के उपलक्ष्य में पांच दिवसीय वेबिनार के पहले दिन वक्ताओं ने योग की महत्ता बताते हुए इसके लिए लोगों से आगे आने का आह्वान किया। उद्घाटन समारोह में यूजीसी के चेयरमैन प्रो. डीपी सिंह ने कहा कि विश्वविद्यालयों महाविद्यालयों में योग को बढ़ावा देने के लिए प्रचार प्रसार किया जा रहा है। साथ ही अधिक से अधिक छात्रों को जोड़ा जा रहा है।
अध्यक्षता करते हुए बीएचयू के कुलाधिपति और हाईकोर्ट के अवकाश प्राप्त न्यायाधीश गिरधर मालवीय ने कहा कि योग के विषय में जन जागरूकता को बढ़ावा देने की दिशा में वेबीनार सहित अन्य आयोजनों की जरूरत है।