फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

विधायक विजय मिश्र की पत्नी की अंतरिम अग्रिम जमानत मंजूर, थाने जाकर भरा 1.50 लाख का बांड

Wed, 07 Oct 2020 01:27 PM IST
गीतार्जुन गौतम अमर उजाला नेटवर्क, भदोही
विज्ञापन
विधायक विजय मिश्र की पत्नी। - फोटो : अमर उजाला
विज्ञापन

हाईकोर्ट प्रयागराज से सशर्त जमानत मिलने के बाद भदोही जिले के ज्ञानपुर से बाहुबली विधायक विजय मिश्र की पत्नी और मिर्जापुर-सोनभद्र की एमएलसी रामलली मिश्रा ने बुधवार को गोपीगंज थाने पहुंचकर 1.50 लाख का पर्सनल बांड भरा। कोर्ट ने सात दिन तक सुबह 11 बजे थाने में हाजिरी लगाने का आदेश दिया है।

विज्ञापन

दरअसल, मंगलवार को इलाहाबाद हाईकोर्ट ने विधायक विजय मिश्रा की पत्नी राम लली को राहत देते हुए शर्तों के साथ उनकी अंतरिम अग्रिम जमानत मंजूर कर ली। मगर कोर्ट ने विधायक के बेटे विष्णु मिश्र को अग्रिम जमानत देने से इनकार करते हुए अर्जी खारिज कर दी। यह आदेश न्यायमूर्ति यशवंत वर्मा ने रामलली और अन्य सह अभियुक्तों की अर्जियों की सुनवाई करते हुए दिया।


रामलली को कोर्ट ने डेढ़ लाख रुपये के मुचलके पर रिहा करने का आदेश दिया था। शर्त है कि वह सात अक्तूबर से एक सप्ताह तक रोज 11 बजे विवेचनाधिकारी के समक्ष हाजिर होंगी तथा विवेचना में सहयोग करेंगी। इसके बाद भी बुलाए जाने पर विवेचनाधिकारी के समक्ष पूछताछ के लिए हाजिर होंगी। बिना कोर्ट की अनुमति विदेश नहीं जाएंगी। यदि पासपोर्ट हो तो उसे एसएसपी/एसपी के समक्ष जमा कर देंगी। वह प्रत्यक्ष या परोक्ष रूप से पीड़ित पक्ष को धमकी या प्रलोभन नहीं देंगी।

विज्ञापन
विज्ञापन

कोर्ट ने कहा कि शर्त उल्लंघन की दशा में कोर्ट में अंतरिम अग्रिम जमानत के विरुद्ध अर्जी दी जा सकती है। कोर्ट ने अर्जी पर राज्य सरकार से चार हफ्ते में जानकारी मांगी है। कोर्ट ने विधायक के बेटे विष्णु को यह कहते हुए अग्रिम जमानत देने से इनकार कर दिया है कि वह विवेचना में सहयोग नहीं कर रहे हैं। उनके विरुद्ध गैर जमानती वारंट जारी किया गया है। इसके खिलाफ पुनरीक्षण अर्जी खारिज कर दी गई है। सारा व्यवसाय याची देख रहा है।

एफआईआर दर्ज होने के बाद बैंक से पैसे निकाले हैं। पीड़ित पक्ष ने धमकी देने की शिकायत भी की है। ऐसे में अग्रिम जमानत नहीं दी जा सकती। विष्णु के खिलाफ संत रविदासनगर भदोही के गोपीगंज थाने में एफआईआर दर्ज कराई गई है। गिरफ्तारी से बचने के लिए उन्होंने हाईकोर्ट की शरण ली थी।
और पढ़ें...
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें