नशे की लत में इंजेक्शन लगाने वाले 42 लोग एचआईवी की चपेट में आ गए हैं। ये दीनदयाल उपाध्याय जिला अस्पताल में चलने वाले ओएसटी (ओपिऑयड सबस्टीयूशन थेरेपी) सेंटर के आंकड़े कह रहे हैं। इस सेंटर में नशे के मकड़जाल में जकड़े 162 लोगों का इलाज चल रहा है। इलाज के दौरान सामने आया कि इन 162 लोगों में 42 एचआईवी संक्रमित हो गए हैं।
नशे की लत छुड़ाने के उद्देश्य से जिला अस्पताल में शुरू किया गया ओएसटी सेंटर वाराणसी, मिर्जापुर, आजमगढ़ मंडल का पहला सेंटर है। सेंटर में पिछले तीन साल में 192 लोगों का पंजीकरण किया गया। इसमें 18 लोगों की तो इलाज के दौरान मौत हो गई जबकि 12 लोगों को नशे की गिरफ्ट से बाहर निकाल लिया गया। मौजूदा समय में यहां 162 लोगों का इलाज चल रहा है।
डॉक्टर के अनुसार जिन लोगों का इलाज चल रहा है, उसमें 40 से 70 साल तक की उम्र वालों की संख्या करीब 100 है, जबकि 62 लोग 19 से 40 साल तक की उम्र वाले हैं। स्वास्थ्य कर्मी अपने सामने खिलाते हैं दवानोडल अधिकारी डॉ. प्रेमप्रकाश का कहना है कि नेशनल एड्स कंट्रोल आर्गनाइजेशन (नाको) के तहत चलने वाले इस सेंटर में अब तक 12 लोग पूरी तरह से ठीक हो गए हैं। अब वो नशे से दूर हैं। बाकी जिन 162 लोगों का इलाज चल रहा है, उन्हें रोज अस्पताल आना होता है। यहां स्वास्थ्य कर्मचारी अपने सामने उन्हें दवा खिलाते हैं। इस दवा की खासियत यह है कि इसे खाने के बाद अगर व्यक्ति दोबारा इंजेक्शन से नशा लेता है तो वह प्रभावी नहीं होता।
नशे का इंजेक्शन लेने से मोटी हो जाती है नसें
डॉ. प्रेमप्रकाश का कहना है कि इंजेक्शन में दवा डालकर नशा करने वाले लोग उसको अपने हाथ की नस में लगाते हैं। बार-बार इंजेक्शन लगाने से उनकी नस मोटी हो जाती है। इलाज के दौरान अगर स्वास्थ्यकर्मी को नस में इंजेक्शन लगाना होता है, तो वह मिलती नहीं है। थेरेपी सेंटर पर मेडिकल आफिसर डॉ. प्रशांत वैभव, काउंसलर प्रेमप्रकाश श्रीवास्तव, अंजनी त्रिपाठी, संतराज यादव की टीम ऐसे लोगों का नशा छुड़ाने के लिए इलाज से लेकर काउंसिलिंग में अहम भूमिका निभा रही है।