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महंगाई मार गई...

Tue, 19 Apr 2016 01:53 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, वाराणसी
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शादी-विवाह का मौसम शुरू होते ही दूध की कीमतें आसमान छूने लगी हैं। 15 दिन पहले जो दूध 50 से 55 रुपये प्रति लीटर था, वह सोमवार को 100 का आंकड़ा पार कर गया। दूध की बढ़ी कीमतों का सबसे अधिक फायदा बिचौलिए उठा रहे हैं। दूध उत्पादक और दूधिए से कहीं मोटा मुनाफा इन बिचौलियों को हो रहा है। ज्यादातर बिचौलिए दूध सट्टी के ठेकेदार हैं। सुबह सट्टी में दूध का दाम भी यही ठेकेदार तय करते हैं। ठेकेदारों का  कहना है कि गर्मी में दूध की आवक कम होने और शादी विवाह के चलते मांग अधिक होने की वजह से दूध की कीमतों में उछाल आया है।
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सर्दी के मौसम में जो दूध 25 से 30 रुपये लीटर बिकता है आज उसकी कीमत सौ रुपये से अधिक पहुंचने से शहर की चाय की तमाम दूकानों पर ताला लटक गया है। दूध महंगा होने की वजह से पनीर का दाम भी 450 से 480 रुपये पहुंच गया है। सबसे रोचक पहलू यह है कि बनारस में दूध कारोबार पर उन लोगों का कब्जा है जो दूधारू जानवर पालते ही नहीं। सट्टी का पूरा कारोबार उस ठेकेदार के हाथ में होता है जिसके पास दूध सट्टी के साइकल स्टैंड का ठेका होता है। कई दफा ठेकेदार अथवा उसके लोग ही दूर दराज के गांवों से आने वाले दूधिए से दूध खरीदकर उसे बेचते हैं। आमतौर पर साइकल से दूध का बाल्टा लेकर आने वाले दूधिए से ठेकेदार 30 से 35 रुपये वसूलता है।


दूध सट्टी में सारा नियम कानून ठेकेदार का चलता है। दूध की कीमत दूधिए नहीं बल्कि ठेकेदार ही तय करते हैं। सुबह से शाम तक में मांग के अनुरूप यह कीमत घटती बढ़ती रहती है। कई दफा दूधिए ठेकेदार को दूध बेचकर लौट जाते हैं। बाद में मांग के अनुरूप ठेकेदार इस दूध की मनमानी कीमत भी वसूलने से नहीं चूक ते। रोजाना के ग्राहका का सट्टी में अलग रेट होता है जबकि मिठाई के कारोबारियों का रेट अलग होता है।
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भले ही सट्टियों में दूध के दाम सातवें आसमान पर पहुंच गए हों पर पराग और अमूल ब्रांड के दूध के भाव स्थिर हैं। ये कंपनियां भी गांवों की सहकारी समितियों से दूध खरीदती हैं। ब्रांडेड कंपनियां दूध की शुद्धता की गारंटी भी देती हैं। पराग का दूध आधा लीटर 24 रुपये तो वहीं अमूल का 28 रुपये है।


सट्टी में दूध की कीमत उसकी जांच के बाद ही लगती है। दूध में मिलावट जांचने का अंदाज भी निराला है। ठेकेदार या उसके लोग दूध की टंकी में हाथ डालकर दूध निकालते हैं और उसे चखने के साथ ही उसकी कीमत तय करते हैं। कुल मिलाकर दूध की चिकनाहट ही उसकी कीमत का पैमाना होता है।
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