सुरक्षा एजेंसियों के मुताबिक, वाराणसी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का संसदीय क्षेत्र है। यहां की हर छोटी-बड़ी घटना पर देश-दुनिया की नजर रहती है। वाराणसी या इससे सटे पूर्वांचल के किसी जिले में खास एजेंडे के साथ मुखर तरीके से आवाज उठेगी तो उसका संदेश दूर तक जाएगा।
इस वजह से वाराणसी में चिह्नित लोग गुपचुप तरीके से अपने विचारों को एक-दूसरे से साझा कर उससे जुड़ने के लिए बुद्धिजीवियों के वर्ग को उकसा रहे हैं। वाराणसी के साथ ही पूर्वांचल के अलग-अलग जिलों का लगातार भ्रमण कर रहे हैं। देख रहे हैं कि कहां और किस मुद्दे को हवा देकर सरकार विरोधी माहौल तैयार कर सकते हैं।
आजमगढ़ में हवाईअड्डे के लिए जमीन अधिग्रहण का विरोध किया जा रहा है। कुछ लोग धरना-प्रदर्शन भी कर रहे हैं। सुरक्षा एजेंसियों का कहना है कि एयरपोर्ट के लिए जमीन का अधिग्रहण नियमानुसार स्थानीय लोगों की सहमति से हुआ है। इसके बावजूद अर्बन नक्सल से जुड़े लोग मामले को तूल दे रहे हैं। समूह से जुड़े लोग गुपचुप तरीके से मदद भी कर रहे हैं, लेकिन मंशा के अनुरूप सफलता नहीं मिल सकी है। उत्तर प्रदेश सरकार के सख्त रवैये व कड़ी कार्रवाई के डर से बहुत लोग अर्बन नक्सलियों से दूरी बनाए हुए हैं।
अर्बन नक्सल शब्द कहां से आया
महाराष्ट्र के भीमा कोरेगांव में हिंसा के बाद अर्बन नक्सल शब्द आम लोगों की जुबान पर आया। इसका जिक्र प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी किया था। प्रदेश की शीर्ष सुरक्षा एजेंसी से जुड़े एक अफसर ने बताया कि अर्बन नक्सली अब प्रधानमंत्री के संसदीय क्षेत्र वाराणसी और उससे सटे पूर्वांचल के अन्य जिलों में अपनी पैठ मजबूत कर रहे हैं। इसमें अहम भूमिका कुछ विश्वविद्यालयों के शिक्षाविदों, छात्रों और कुछ एनजीओ संचालकों की है। इनमें से सूचीबद्ध किए गए लोगों की गतिविधियों की लगातार निगरानी की जा रही है। संबंधित लोगों के खिलाफ जल्द ही साक्ष्यों के साथ पुख्ता कार्रवाई की जाएगी।
हम लोग विश्वविद्यालय में सतर्क हैं। सुरक्षा एजेंसियों के सहयोग के लिए भी तत्पर हैं। विश्वविद्यालय के छात्र छात्राओं को हम हमेशा जागरूक करते हैं कि वे संदिग्ध लोगों की सूचना हम तक पहुंचाएं।
प्रो. एके त्यागी, कुलपति, महात्मा गांधी काशी विद्यापीठ
विश्वविद्यालय परिसर में धरना, प्रदर्शन और मारपीट की घटनाओं में हम बाहरी गतिविधियों को लेकर ज्यादा सतर्क रहते हैं। हमारी खुद की इंटेलीजेंस टीम भी समय समय पर जांच करती है और सुरक्षा एजेंसियों से संपर्क करते हैं।
प्रो अभिमन्यु सिंह, चीफ प्राक्टर, बीएचयू