बनारस यूथ थियेटर और उत्तर प्रदेश संस्कृत संस्थान की ओर से भारतीय शिक्षा मंदिर में चल रही 30 दिवसीय भारतीय शास्त्रीय अभिनय कार्यशाला के तहत बृहस्पतिवार को मास्टर क्लास चली। राष्ट्रीय नाट्य विद्यालय के वाराणसी केंद्र के निदेशक प्रवीण कुमार गुंजन ने रंगमंच और संस्कृत नाटकों के महत्व पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि अपनी माटी, भाषा, अपने घर, साहित्य से अपनापन ही भारतीयता है। पीढि़यां अपनी नानी-दादी की किस्से और कहानियां सुनकर बड़ी हुई हैं। स्वागत अदिति गुलाटी, संचालन संस्था के अध्यक्ष उत्कर्ष उपेंद्र सहस्रबुद्धे एवं धन्यवाद ज्ञापन अर्चना निगम ने किया। इस मौके पर सत्येंद्र, चाहत, आशुतोष, सिद्धि, विशाल आदि रहे।