रेल अधिकारियों के अनुसार, धार्मिक व ऐतिहासिक पर्यटन को बढ़ावा देने के उद्देश्य से वाराणसी-झांसी के बीच वंदे भारत चलाने का खाका तैयार किया गया है। वाराणसी-झांसी रूट के जरिये चित्रकूट से भी जुड़ाव होगा। भगवान राम ने वनवास के दौरान चित्रकूट में समय व्यतीत किया था। वाराणसी और चित्रकूट को जोड़ते हुए लंबे समय से इसकी मांग पर्यटन उद्यमियों की ओर से की जा रही थी।
वाराणसी-झांसी के बीच बनारस स्टेशन से बुंदेलखंड एक्सप्रेस का संचालन होता है। इस ट्रेन के जरिये यात्रियों का सफर 12 से 13 घंटे का होता है। वंदे भारत से यह दूरी साढ़े छह से सात घंटे में तय की जा सकेगी।
रेलवे बोर्ड के अधिकारी ने बताया कि जोन से मिले प्रस्ताव के तहत वाराणसी से वंदे भारत एक्सप्रेस सुबह दस बजे खुलेगी और दोपहर डेढ़ बजे तक चित्रकूट पहुंच जाएगी। शाम लगभग साढ़े चार से पांच बजे तक झांसी पहुंच जाएगी।
उत्तर मध्य रेलवे क्षेत्रीय परामर्श दात्री समिति के सदस्य अरविंद कुमार त्रिपाठी ने बताया कि वाराणसी-झांसी वंदे भारत एक्सप्रेस के संचालन का प्रस्ताव रेलवे बोर्ड को भेजा गया है। इसमें वाराणसी-आगरा वंदे भारत का भी प्रस्ताव शामिल है। प्रस्ताव पर मुहर लगी तो फिर वाराणसी समेत पूर्वांचल के यात्रियों को बड़ी सहूलियत मिलेगी। वाराणसी-हावड़ा के बीच वंदे भारत एक्सप्रेस प्रस्तावित है। यह ट्रेन पटना को जोड़ते हुए अप-डाउन करेगी।
देश की पहली वंदे भरत काशी से दिल्ली के बीच चल रही है। बृहस्पतिवार को छोड़कर ट्रेन का आवागमन रोजाना होता है। काशी से जाने वाली इस ट्रेन में तीन अक्तूबर तक वेटिंग टिकट है। नई दिल्ली से लौटने वाली ट्रेन में भी यही हाल है।