एक्सपो में कालीन निर्माण के ढेरों विकल्प मौजूद हैं। यहां पापकार्न, जूट, केला, भिंडी का तना, बंबू सिल्क से तैयार छोटे कालीन का प्रदर्शन किया गया है। इसके अलावा इन कच्चे माल से डोर मैट, टेबल मैट, विंडो स्क्रीन मैट आदि भी बनाया जा सकता है। जॉली इंटरप्राइजेज के स्टॉल पर इनसे तैयार उत्पादों का प्रदर्शन किया गया है। कंपनी के प्रतिनिधि अमल कुमार ने बताया कि यह सेहत और वातावरण दोनों को नुकसान नहीं पहुंचाते।
वहीं इस बार माइक्रो धागा और एकरैलिक धागे की खूब मांग है। यह हल्के कालीन निर्माण के साथ ही शोवर भी होते हैं। पानीपत के स्टॉल पर निर्यातकों के लिए यह आकर्षण का केंद्र रहा। 21 अक्तूबर से चल रही चार दिवसीय कालीन प्रदर्शनी अंतिम दिन, बुधवार को आम लोगों के लिए खुली रहेगी। शाम को समापन समारोह होगा।
प्रदर्शनी में वाराणसी हस्तशिल्प के स्टाल पर ऊन पर सिल्क की तीन लेयर से तैयार खास कालीन को मोदी कालीन नाम दिया गया है। यह कालीन विदेशी ट्रेडर्स को काफी पसंद आ रहा है। कंपनी निदेशक दिलीप टंडन ने बताया कि प्रधानमंत्री के ‘मेक इन इंडिया’ के नारे के बाद उन्होंने कई नए प्रयोग किए। एक कालीन में वह 12 से 15 कलर का प्रयोग करते हैं। इनके अंतर को पता करना बहुत ही मुश्किल होता है। साठ से ज्यादा देशों को कालीन का निर्यात कर रहे हैं। वर्जीनिया के जेरी कंबूरियन ने उनके कालीन की तारीफ की।