डीएवी पीजी कॉलेज में राजनीति विज्ञान विभाग की ओर से आयोजित संगोष्ठी में वक्ताओं ने सांस्कृतिक राष्ट्रवाद और सॉफ्ट पावर पर चर्चा की। मुख्य वक्ता जवाहर लाल नेहरू विश्वविद्यालय, नई दिल्ली के स्कूल ऑफ इंटरनेशनल स्टडीज के वरिष्ठ आचार्य प्रो. अश्विनी महापात्रा ने कहा कि आरएसएस द्वारा प्रचारित प्रतिमानों के माध्यम से भारत न सिर्फ दक्षिण एशिया बल्कि पूरे विश्व में सॉफ्ट पॉवर के रूप में स्थापित हों रहा है।
राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ, सांस्कृतिक राष्ट्रवाद और सॉफ्ट पावर : उभरते प्रतिमान विषय पर प्रो. महापात्रा ने कहा कि आरएसएस भारत की आंतरिक चेतना को जागृत करने वाला संगठन है। भारतीय राष्ट्रवाद पश्चिमी देशों विशेष तौर से अमेरिकी राष्ट्रवाद से बिल्कुल विपरीत है। वहां का राष्ट्रवाद क्षेत्रीय भौगोलिक आधार पर बने राष्ट्र के लिए है, जबकि भारतीय राष्ट्रवाद सांस्कृतिक और मानवीय मूल्यों पर आधारित है। बीएचयू में दीनदयाल उपाध्याय चेयर के प्रो. टीपी सिंह ने पं. दीनदयाल उपाध्याय के आदर्शों और राष्ट्र के प्रति उनकी प्रतिबद्धता का स्मरण करते हुए कहा कि उन्होंने राष्ट्र की पाश्चात्य अवधारणा को पुरजोर तरीके से ध्वस्त किया। कहा कि आरएसएस ने सदैव भारतीय संस्कृति को आगे बढ़ाया है। संगोष्ठी में प्रो. कृष्ण मोहन पांडेय, प्रो. जयशंकर झा, प्रो. अनूप कुमार मिश्र आदि ने विचार रखे। स्वागत प्रबंधक अजीत कुमार सिंह यादव और धन्यवाद ज्ञापन डॉ. प्रतिमा गुप्ता ने किया।