कार्यक्रम में मुख्य अतिथि भारतीय इतिहास संकलन योजना नई दिल्ली के राष्ट्रीय सचिव डॉ. बालमुकुंद पांडेय ने अपने व्याख्यान के दौरान कहा कि हमें भारतीय संस्कृति के पैमाने को आत्मसात करने की आवश्यकता है। हमें परिवार को केंद्र बनाकर समाज को नई दिशा देने की जरूरत है। हमें आज अपनी प्राचीन सामाजिक व्यवस्था प्राचीन संस्कारों को अपनाने का समय आ गया है।
समापन सत्र की अध्यक्षता पूर्व संकायाध्यक्ष प्रोफेसर राम प्रवेश पाठक ने की उन्होंने कहा कि सम्पूर्ण मानव समाज में विनाश और निर्माण के संदर्भ एक साथ चलते हैं। अतः आवश्यकता है कि हम सभी इस महामारी के समय में चैतन्य रूप से खड़ा हो कर एक दूसरे का सहयोग करें।
सत्र पूर्णता के अंतिम क्रम में सहायक प्रोफेसर रोहित कुमार द्वारा वेबीनार की विस्तृत रिपोर्ट पढ़ी गई। उन्होंने बताया कि इस तीन दिवसीय अंतरराष्ट्रीय वेबीनार में कुल 25 तकनीकी सत्र चले और कुल 250 शोध पत्र पढ़े गए। उन्होंने शोध पत्रों का समीक्षा पूर्ण विवरण प्रस्तुत किया। कार्यक्रम का संचालन डॉ. सीमा मिश्रा द्वारा किया गया।
कार्यक्रम में मुख्य रूप से विभागाध्यक्ष केशव मिश्र, प्रो. घनश्याम, प्रो. मालविका पांडेय, प्रो. प्रवेश भारद्वाज, डॉ. मृदुला जायसवाल व अन्य शिक्षक समलित रहे। कार्यक्रम के अंत में वेबीनार की संयोजिका डा० अनुराधा सिंह द्वारा धन्यवाद ज्ञापन प्रेषित किया गया।