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वैश्विक महामारी के समय भारत संपूर्ण दुनिया के लिए बना नेतृत्व का वाहक

Fri, 29 May 2020 09:17 PM IST
विचित्र सिंह न्यूज डेस्क, अमर उजाला, वाराणसी
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अंतरराष्ट्रीय वेबिनार। - फोटो : अमर उजाला।
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काशी हिन्दू विश्वविद्यालय के इतिहास विभाग में चल रहे तीन दिवसीय अंतरराष्ट्रीय वेबीनार के अंतिम दिन के प्रथम सत्र में प्रो. बिंदा परांजपे, प्रो. मालविका रंजन, डॉ. अफजल अहमद का व्याख्यान  हुआ। सत्र समाप्ति के पश्चात समापन समारोह प्रारंभ हुआ। इसके मुख्यवक्ता प्रो. आनंद शंकर ने दुनिया में फैली महामारियों के इतिहास पर चर्चा की और दुनियां की कई सभ्यताओं के बिखरने का कारण महामारी को बताया। 

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उन्होंने मानव और प्रकृति दोनों को एक दूसरे का पूरक बताया। उन्होंने कहा कि यह आपदा मानव जीवन के बदलते रहन सहन के कारण उपस्थित हुई है। इस वैश्विक महामारी के समय भारत संपूर्ण दुनिया के लिए नेतृत्व का वाहक बना हुआ है। हमारी तकनीकी बदल रही है। हमें अपने वैचारिक मूल्य भी बदलने हैं। अब आवश्यकता है कि साम्यवाद और पूंजीवाद से परे हम विकास का माध्यम मार्ग अपनाया जाए।


कार्यक्रम के विशिष्ट अतिथि प्रोफेसर राजेश सिंह, कुलपति पूर्णिया विश्वविद्यालय ने विश्वविद्यालयों में लॉकडाउन के दौरान चल रहे शैक्षणिक नवाचारों की विस्तृत चर्चा की। उन्होंने व्याख्यानों को संग्रहित कर लेक्चर बैंक बनने की वकालत की। प्रोफेसर राजेश सिंह ने भारत में इंटरनेट का कम इस्तेमाल होने पर भी चिंता जाहिर की और कहा कि हम भारतीयों को तकनीकी से और अधिक मित्रवत होना चाहिए।

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कार्यक्रम में मुख्य अतिथि भारतीय इतिहास संकलन योजना नई दिल्ली के राष्ट्रीय सचिव डॉ. बालमुकुंद पांडेय ने अपने व्याख्यान के दौरान कहा कि हमें भारतीय संस्कृति के पैमाने को आत्मसात करने की आवश्यकता है। हमें परिवार को केंद्र बनाकर समाज को नई दिशा देने की जरूरत है। हमें आज अपनी प्राचीन सामाजिक व्यवस्था प्राचीन संस्कारों को अपनाने का समय आ गया है।

समापन सत्र की अध्यक्षता पूर्व संकायाध्यक्ष प्रोफेसर राम प्रवेश पाठक ने की उन्होंने कहा कि सम्पूर्ण मानव समाज में विनाश और निर्माण के संदर्भ एक साथ चलते हैं। अतः आवश्यकता है कि हम सभी इस महामारी के समय में चैतन्य रूप से खड़ा हो कर एक दूसरे का सहयोग करें।

सत्र पूर्णता के अंतिम क्रम में सहायक प्रोफेसर रोहित कुमार द्वारा वेबीनार की विस्तृत रिपोर्ट पढ़ी गई। उन्होंने बताया कि इस तीन दिवसीय अंतरराष्ट्रीय वेबीनार में कुल 25 तकनीकी सत्र चले और कुल 250 शोध पत्र पढ़े गए। उन्होंने शोध पत्रों का समीक्षा पूर्ण विवरण प्रस्तुत किया। कार्यक्रम का संचालन डॉ. सीमा मिश्रा द्वारा किया गया।

कार्यक्रम में मुख्य रूप से विभागाध्यक्ष केशव मिश्र, प्रो. घनश्याम, प्रो. मालविका पांडेय, प्रो. प्रवेश भारद्वाज, डॉ. मृदुला जायसवाल व अन्य शिक्षक समलित रहे। कार्यक्रम के अंत में वेबीनार की संयोजिका डा० अनुराधा सिंह द्वारा धन्यवाद ज्ञापन प्रेषित किया गया।
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