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किस दशा में हैं बाबा विश्वनाथ की कचहरी से निकाले गए शिवलिंग

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काशी विश्वनाथ मंदिर के पूर्व महंत डॉ. कुलपति तिवारी को भारतीय सवर्ण संघ का संरक्षक बनाया गया है। इस अवसर पर आयोजित बैठक को संबोधित करते हुए डॉ. तिवारी ने कहा कि सवर्ण संघ यह जानना चाहता है कि बाबा विश्वनाथ की कचहरी से निकाले गए शिवलिंग कहां और किस दिशा में हैं। काशी विद्वत परिषद से भी अनुरोध किया गया है कि प्राचीन देवालयों को तोड़ने को संज्ञान में लें और शास्त्र सम्मत पक्ष सामने रखें।
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डॉ. तिवारी ने कहा कि लिखित आश्वासन देने के बाद भी विश्वनाथ धाम के अंतर्गत आने वाले निजी देवालयों को उनके मूल स्वामियों को लौटाने की क्या नीति अपनाई जा रही है। वर्तमान में जो कुछ हो रहा है उससे बड़ी संख्या में लोग मर्माहत हैं। विश्वनाथ धाम के कार्य में पारदर्शिता से होनी चाहिए। अधिकारियों की कार्यशैली के कारण कई प्रकार के संशय हो रहे हैं। संघ मुख्यमंत्री से भी अनुरोध करता है कि धर्म से जुड़े व्यक्ति होने के नाते वह भी इस प्रकरण पर गंभीरता से विचार करें।
उन्होंने कहा कि मंदिर से गंगा दर्शन की आड़ में प्राचीन देवालयों को ध्वस्त किया जाना किसी भी दृष्टि से तर्कसंगत नहीं है। मंदिर के धार्मिक अधिकार मंदिर के महंतों को सौंपा जाए। महंतों के आय का साधन समाप्त हो गया है। यदि सरकारी करण से पूर्ण मुक्ति नहीं मिलती तो उस दशा में चढ़ावे में पचास फीसदी भागीदारी दी जाए। उन्होंने सरकार से आर्थिक स्तर पर आरक्षण के बारे में विचार करने की मांग की। इस दौरान विंध्याचल मंदिर के प्रमुख शृंगारिया पं. कृष्ण मोहन महाराज एवं संघ के राष्ट्रीय महासचिव पं. साधु तिवारी आदि मौजूद रहे।
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