राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा अधिनियम के तहत जिले के हर गरीब को अनाज मिलना फिलहाल मुश्किल है। प्रशासन ने आनन फानन में आटोमेशन थंब इंप्रेशन मशीन से अनाज बांटने की योजना की शुरुआत तो कर दी है लेकिन हकीकत यह है कि अब भी 67 फीसदी ऐसे कार्डधारक हैं, जिनके राशन कार्ड का सत्यापन ही नहीं हो सका है। हैरानी की बात यह है कि तीन साल से सत्यापन का काम चलने के बाद भी यह स्थिति है। कौन पात्र और कौन अपात्र है, इसका पता खुद निगरानी करने वाले आपूर्ति विभाग को नहीं है। सत्यापन का काम जल्द पूरा न हुआ तो आॅटोमेशन थंब इंप्रेशन मशीन से अनाज बांटने की योजना अधर में लटक जाएगी।
विभागीय अधिकारियों की मानें तो जिले में 618369 कार्डधारक हैं। शहर में 130 दूकानें और गांव में 361 दूकानों के कार्डधारकों का सत्यापन हुआ है। अब भी 67 प्रतिशत कार्डधारकों का सत्यापन होना बाकी है। यही नहीं हजारों पात्रों का पात्र गृहस्थी कार्ड भी नहीं बना है। जिन लोगों का कार्ड बना है उनके यहां भी परिवार के हर सदस्य का नाम नहीं है। आशुतोष नगर कॉलोनी में गुरुवार को जब डीएम आटोमेशन मशीन का उद्घाटन कर रहे थे, उसी दौरान चंदा देवी ने शिकायत की कि सबका राशन कार्ड नहीं बना है। डीएम ने जांच कर कार्रवाई का आश्वासन दिया। हाल ही में डीएम की अध्यक्षता में हुई बैठक में तय हुआ था कि अपात्रों का नाम सूची से काटा जाएगा। साथ ही, पात्रों का नाम जोड़ा जाएगा।
बावजूद इसके सबके कार्ड अब तक नहीं बन पाए हैं। हालांकि सत्यापन न होने के बावजूद धड़ल्ले से हर महीने अनाज बंट रहा है। शासन से मिली गाइडलाइन के अनुसार पात्र और अपात्र की सूची तैयार की जा रही है। यह काम बीते तीन सालों से चल रहा है लेकिन अब तक सूची का सत्यापन कार्य पूरा नहीं हुआ है। जिस तरह काम चल रहा है उसे देखते हुए अभी इसे पूरा होने में कितना समय लगेगा, भगवान ही मालिक।