पूर्वजों की आत्मा की शांति के लिए पितृपक्ष के पहले दिन काशी में गंगा तटों और कुंडों पर तर्पण-अर्पण करने लोगों का रेला उमड़ पड़ा। तीर्थपुरोहितों ने पितृपक्ष के पिंडदान को पौधरोपण से जोड़कर पर्यावरण रक्षा की मुहिम को आगे बढ़ाया। चक्रपुष्करिणी तीर्थ मणिकर्णिका पर पिंडदान के बाद पौधे लगाने का संकल्प दिलाया गया। मध्यप्रदेश, छत्तीसगढ़, झारखंड के सैकड़ों लोग पूर्वजों की याद में पौधे लगाने का संकल्प लेकर रवाना हुए।
काशी बाहें पसार कर परंपराओं को गले लगाने के लिए जहां खड़ी रहती है, वहीं पर्यावरण रक्षा के उपायों पर सार्थक पहल से नहीं चूकती। पिंडदान करने काशी आने वाले लोगों को पौधरोपण का संकल्प दिलाना इसकी एक बानगी है। सोमवार की सुबह दशाश्वमेध, अहिल्याबाई, शीतला घाट के अलावा अस्सी, मणिकर्णिकातीर्थ, प्रह्लाद घाट, राजघाट के अलावा पिशाचमोचन कुंड पर हजारों लोगों ने पिंडदान किया। मणिकर्णिका के नेपाली लालमोहिया प्रधान तीर्थ पुरोहित रवि महाराज ने अपने यजमानों को पिंडदान के
बाद एक-एक पौधा लगाने का संकल्प दिलाया। छत्तीसगढ़ के सुभाषनगर स्थित मितान चौक की रहने वाली सहायक अध्यापिका नंदिनी देशमुख और उनके पति नंद कुमार देशमुख ने पांच-पांच पौधे लगाने का संकल्प लिया। पुरोहित रवि महाराज ने उनको तुलसी के पौधे का संकल्प दिलाया। प्रह्लाद घाट के तीर्थपुरोहित मंगला प्रसाद ने भी पिंडदान लोगों को पौधा लगाने का संकल्प दिलाया। इस मुहिम को दो साल पहले अमर उजाला की पहल पर ही तीर्थपुरोहितों ने शुरू किया था।