वाराणसी। आईएमएस बीएचयू के निश्चेतना विभाग की ओर से रविवार को आयोजित कार्यशाला में चिकित्सकों ने गुर्दा रोग से पीड़ित मरीजों के इलाज की विधियों पर मंथन किया। ट्रामा सेंटर के सभागार में आयोजित कार्यशाला में इसमें आईसीयू में भर्ती ऐसे मरीजों के इलाज पर विशेष ध्यान देने के साथ ही आधुनिक तकनीक का प्रयोग करने का निर्णय लिया गया।
बीएचयू अस्पताल के चिकित्सा अधीक्षक और निश्चेतना विभाग के अध्यक्ष डॉ. एसके माथुर ने बताया कि आईसीयू में भर्ती गंभीर मरीजों में 50 प्रतिशत ऐसे मरीज होते हैं, जिसमें गुर्दा संबंधी समस्या बढ़ जाती है। ऐसे में सही समय पर बेहतर इलाज किया जाना जरूरी होता है। आयोजन के सहसचिव और गुर्दा रोग विभाग के विभागाध्यक्ष डॉ. शिवेंद्र सिंह ने बताया कि अगर सही समय पर समस्या के बारे में जानकारी मिल जाए तो उसका इलाज संभव है। इलाज में देर होने पर मरीज को परेशानी बढ़ जाती है और जान बचाना मुश्किल हो जाता है।
इस दौरान पावर प्वाइंट प्रेंजेंटेशन के माध्यम से डायलिसिस, रीनल रिप्लेसमेंट थेरेपी सहित इलाज की अन्य विधियों के बारे में बताया गया। इस दौरान डा. विक्रम गुप्ता ने आईसीयू में होने वाले एक्यूट किडनी इंजरी एवं उसके इलाज की विधियों और समस्याओं पर प्रकाश डाला। इस दौरान डॉ. दीपक गोविल ने रीनल रीप्लेसमेन्ट थेरेपी के प्रयोग के समय व उससे होने वाले परिवर्तन की जानकारी दी। कार्यक्रम में डॉ.सचिन गुप्ता ने डायलिसिस के दुष्प्रभाव से बचने के तरीकों को समझाया। इस दौरान डॉ. रणजीत चटर्जी, डॉ. साई सरन डॉ. अरूण राज, डॉ शैलजा बेहरा,डां मधुप आदि मौजूद रहे।