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आईएमएस बीएचयू: आंखों का कैंसर, चोट, टयूमर वाले मरीजों की जटिल सर्जरी में मददगार होगा आर्बिटल नेविगेशन तकनीक

Thu, 03 Sep 2026 05:36 PM IST
Aman Vishwakarma अमर उजाला नेटवर्क, वाराणसी।

सार

आईएमएस बीएचयू क्षेत्रीय नेत्र संस्थान उत्तर प्रदेश का पहला संस्थान बन गया है। यहां कुलपति ने आर्बिटल नेविगेशन तकनीक का उद्घाटन किया। यह तकनीक आंखों के कैंसर, चोट और ट्यूमर के मरीजों की जटिल सर्जरी में सहायक होगी।
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आईएमएस बीएचयू के क्षेत्रीय नेत्र संस्थान की टीम। - फोटो : संवाद
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विस्तार
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आईएमएस बीएचयू के क्षेत्रीय नेत्र संस्थान में अब आंखों में चोट, टयूमर और कैंसर वाले मरीजों की जटिल सर्जरी में आर्बिटल नेविगेशन तकनीक का उपयोग किया जाएगा। इसकी खासियत यह है कि यह तकनीक सर्जरी करने वाले डॉक्टरों के लिए मददगार साबित होगी। इसकी मदद से सर्जरी के दौरान उपकरण सहीं दिशा में काम कर रहा है या नहीं, इसकी भी सटीक जानकारी मिलेगी। कुलपति प्रो. अजित कुमार चतुर्वेदी ने बृहस्पतिवार को संस्थान पहुंचकर नई सुविधा का उदघाटन किया। ऑपरेशन थिएटर पहुंचकर उन्होंने इस तकनीकी से सर्जरी करने का एक डेमो भी देखा।

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आर्बिटल नेविगेशन तकनीक शुरू करने वाला आईएमएस बीएचयू का क्षेत्रीय नेत्र संस्थान यूपी का पहला संस्थान बन गया। क्षेत्रीय नेत्र संस्थान के विभागाध्यक्ष प्रो.आरपी मौर्य का कहना है कि आर्बिटल नेविगेशन सिस्टम एक तरह का इमेज गाइडेड नेविगेशन मशीन है। इसकी खासियत यह है कि यह एक सेटेलाइट की तरह सर्जरी के दौरान डॉक्टर को रियल टाइम ट्रैकिंग करने में मददगार साबित होती है। 

कार्यक्रम के दौरान क्षेत्रीय नेत्र संस्थान के चेयरमैन और नेत्र चोट के विशेषज्ञ प्रो.आरपी मौर्या की अगुवाई में ओरल एवं मैक्सिलोफेशियल सर्जन प्रो.अखिलेश कुमार सिंह, रेडियोलॉजी विभाग से प्रो.आशीष वर्मा ने ओटी में कुलपति प्रो.अजित कुमार चतुर्वेदी के सामने आर्बिटल नेविगेशन सिसटम के कामकाज के बारे में बताया। 

कहा कि जटिल ऑर्बिटल एवं क्रेनियोफेशियल सर्जरी में इसका बेहतर उपयोग होगा। कार्यक्रम के दौरान 41वें राष्ट्रीय नेत्रदान पखवाड़े के अवसर पर नेत्रदाताओं के परिजनों को कुलपति ने सम्मानित किया। कहा कि देश में नेत्रदान करने वाले दाताओं और कॉर्निया प्रत्यारोपण की आवश्यकता वाले मरीजों के बीच अभी भी बहुत बड़ा अंतर है। अंत्येष्टि से पूर्व स्वैच्छिक कॉर्निया दान के संबंध में सामाजिक जागरूकता बढ़ाना समय की आवश्यकता है। 

कुलपति ने कहा कि अत्याधुनिक तकनीकों का उपयोग न केवल रोगियों को बेहतर एवं उच्चस्तरीय चिकित्सा सुविधा उपलब्ध कराने में सहायक होगा, बल्कि चिकित्सा शिक्षा, प्रशिक्षण एवं अनुसंधान को भी मजबूत करेगा। इससे जटिल ऑर्बिटल एवं क्रेनियोफेशियल रोगों से पीड़ित मरीजों के लिए समग्र एवं उन्नत उपचार की सुविधा उपलब्ध होगी। 

प्रो.आरपी मौर्य ने बताया कि इस सुविधा के शुरू होने से मेडिकल छात्रों, रेजिडेंट्स एवं चिकित्सकों को इमेज-गाइडेड तथा नेविगेशन-असिस्टेड सर्जरी में प्रशिक्षण देने के साथ-साथ क्लिनिकल रिसर्च एवं नवाचार के लिए भी एक महत्वपूर्ण मंच प्रदान करेगी। इस दौरान आईएमएस बीएचयू के निदेशक प्रो.एसएन संखवार, चिकित्सा संकाय प्रमुख प्रो.संजय गुप्ता, बीएचयू अस्पताल के एमएस प्रो.पुनीत कुमार, प्रो.दीपक मिश्रा सहित कई लोग मौजूद रहे।
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क्या है आर्बिटन नेविगेशन तकनीक
प्रो.आरपी मौर्य का कहना है कि आर्बिटल नेविगेशन तकनीक सर्जन को ऑपरेशन के दौरान जटिल शारीरिक संरचनाओं की सटीक पहचान, स्थिति निर्धारण एवं वास्तविक समय में नेविगेशन में सहायता प्रदान करेगी। साथ ही उन्नत मेडिकल इमेजिंग को रियल-टाइम सर्जिकल नेविगेशन के साथ एकीकृत करने से जटिल ऑर्बिटल रोगों एवं चोटों के उपचार में सर्जिकल सटीकता, सुरक्षा एवं परिणामों में सुधार होगा। 

यह तकनीक विशेष रूप से ऑर्बिटल ट्यूमर, ऑर्बिटल ट्रॉमा, जटिल क्रेनियोफेशियल चोटों, ऑर्बिटल रिकंस्ट्रक्शन, स्कल-बेस घावों तथा अन्य जटिल ऑर्बिटल स्थितियों के उपचार में उपयोगी होगी। इससे रोगग्रस्त संरचनाओं तथा महत्वपूर्ण शारीरिक संरचनाओं का सटीक स्थानीयकरण, बेहतर प्री-ऑपरेटिव प्लानिंग तथा ऑपरेशन के दौरान सटीक मार्गदर्शन संभव होगा।
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