एक नजर में आंकड़े
प्रोफेसर 19, एसोसिएट प्रोफेसर-6, असिस्टेंट प्रोफेसर-2, (इसके अलावा 20 से ज्यादा रेजिडेंट भी हैं) बीडीएस में सीट -63, एमडीएस में सीट-24, डिप्लामा इन डेंटल मैकेनिकल, डिप्लोमा इन डेंटल हाइजिनिष्ट
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क्या बोले चिकित्सक
वाराणसी सहित आसपास के जिलों में किसी भी अस्पताल में आरसीटी नहीं होती है। इस वजह से मरीजों की भीड़ रहती है। संकाय में पीजी के छात्रों को आरसीटी की जिम्मेदारी दी गई है। पीजी में सीट की संख्या कम होने से छह महीने की बेटिंग है। सीट बढ़ाने की दिशा में प्रयास चल रहा है। -
प्रो. एचसी बरनवाल, संकाय प्रमुख, दंत चिकित्सा संकाय
देश के सर्वश्रेष्ठ 15 संस्थानों में
आईएमएस बीएचयू के दंत चिकित्सा विज्ञान संकाय का नाम देश के सर्वश्रेष्ठ 15 संस्थानों में है। हाल ही में शिक्षा मंत्रालय ने जी एनआईआरएफ रैंकिंग जारी की थी, उसमें इस फैकल्टी को चिकित्सा शिक्षा, मरीजों की सेवा के मामले में टॉप 20 संस्थानों में 15 नंबर पर जगह मिली थी।
आरसीटी में देरी से ये परेशानी
- दांत के अंदर संक्रमण के साथ ही पस भर जाएगा। जबड़े की हड्डी और गाल तक फैल सकता है।
- दांत में इंफेक्शन के कारण गाल, जबड़ा और गर्दन तक सूजन आ सकती है।
- दांत कमजोर होकर होकर गिर जाएंगे।
- दांतों में सड़न से बैक्टीरिया खून में मिलकर शरीर के दूसरे अंगों दिल, फेफड़े, मस्तिष्क तक पहुंच सकते हैं।
केस एक
चांदपुर निवासी एमके सिंह के दांतों में तेज दर्द था। 18 जून को पहली बार डेंटल फैकल्टी गए। डॉक्टर को दिखाया तो उन्होंने कई जांच लिखी। इसके बाद 14 अगस्त को बुलाया। डॉक्टर ने आरसीटी करवाने को कहा। जनवरी 2026 के पहले सप्ताह में बुलाया गया है। बीमारी बढ़ने को लेकर परेशान हैं।
केस दो
चंदौली के ताराजीवनपुर निवासी अजीत यादव को दांतों में सड़न हो गई थी। पहले तो उन्होंने चंदौली में डॉक्टर को दिखाया। इसके बाद डॉक्टर ने आरसीटी करवाने को कहा। डॉक्टर ने बीएचयू जाने की सलाह दी। वहां फरवरी की डेट मिली है। दूसरे जगह इलाज करवाने का फैसला लिया।