कोवैक्सीन के दुष्प्रभाव पर प्रकाशित शोध के मामले में आईएमएस की ओर से गठित जांच कमेटी में अलग-अलग पब्लिकेशन को शामिल किया गया है। सभी रिसर्च पेपर में दोनों के नाम शामिल हैं। तीन में आईसीएमआर, बीएचयू इंस्टीट्यूट ऑफ एमिनेंस और दो में हरियाणा स्थित महर्षि मार्कण्डेयश्वर यूनिवर्सिटी (डीम्ड) जैसे शैक्षणिक संस्थान का भी सहयोग मिला है।
कोवैक्सीन पर दुष्प्रभाव वाले शोध की आईएमएस के स्तर पर गठित जांच कमेटी अपनी जांच कर रही है। प्रथम दृष्टया तथ्यों की कमी, मरीजों से टेलीफोन पर बात कर जानकारी लेने, बिना आईसीएमआर की स्वीकृति के नाम जोड़ने और आईएमएस की एथिकल कमेटी से अप्रूवल न लेने का मामला सामने आया है।
नया मामला यह है कि प्रो. चक्रवर्ती ने जो शोध किया है, उसमें अन्य सदस्यों के साथ ही डॉ. उपिंदर कौर को शामिल किया है और डॉ. उपिंदर उनकी पत्नी हैं। खास बात यह है कि साल 2020 में दो और 2021 में सर्वधिक चार रिसर्च पेपर का प्रकाशन कराया गया। इस बारे में पूछे जाने पर प्रो. चक्रवर्ती का कहना है कि वह और उनकी पत्नी डॉ. उपिंदर ने नियम के अनुसार शोध किया है। सभी गाइडलाइन का पालन किया गया है।
जांच के बीच ही प्रो. एसएस चक्रवर्ती बाहर चले गए थे। मंगलवार को वह वाराणसी लौटे। बुधवार को आईएमएस निदेशक प्रो. एसएन संखवार ने प्रो. चक्रवर्ती और उनकी पत्नी डॉ. उपिंदर कौर दोनों को तलब किया। निदेशक ने बताया कि दोनों ने शोध पर उठ रहे सवाल के बाबत चल रही जांच में तथ्यों की कमी समेत अन्य खामियों पर अपनी गलती मानी है। इस दौरान आईएमएस के डीन रिसर्च प्रो. गोपाल नाथ भी मौजूद रहे। दोनों को चेतावनी दी गई है कि भविष्य में कोई भी शोध करें तो उसके बारे में पहले निर्धारित कमेटी को विस्तार से बताना होगा। इसके बाद स्वीकृति मिलने पर ही शोध कार्य आगे बढ़ाएं।