आरोप-प्रत्यारोप और हंगामे के बीच विकास भवन सभागार में शनिवार को 338 करोड़ रुपये की जिला योजना पारित कर दी गई। वित्तीय वर्ष 2015-16 में केंद्र की धनराशि भी शामिल कर देने से इस वर्ष 46 विभागों का बजट दो गुना से ज्यादा हो गया है। पिछले साल की योजना 156 करोड़ रुपये की थी।
इस बार ग्रामीण इलाकों में टायलेट और यूरिनल निर्माण, सड़कों और पेयजल की व्यवस्था बेहतर बनाने पर जोर दिया गया है। जिले के प्रभारी व प्रदेश के स्वास्थ्य मंत्री अहमद हसन की अध्यक्षता में हुई बैठक में सदस्यों ने सड़क और टाॅयलेट की समस्या उठाई गई लेकिन सबसे ज्यादा जोर पेयजल योजना पर रहा। मुस्तफाबाद पेयजल परियोजना की रकम में गोलमाल की शिकायत पर गड़बड़ी करने वाले अभियंताओं के खिलाफ मुकदमा दर्ज कराने का आदेश देना पड़ा।
बैठक शुरू होते ही जिला पंचायत सदस्य सुरेंद्र नारायण सिंह ने जिला पंचायत सदस्यों की उपेक्षा का मुद्दा उठाया। योगेश सिंह व रमेश अज्ञात ने भी उनके सुर में सुर मिलाया। विधायक श्यामदेव रायचौधरी ने प्रह्लादघाट में लगे पंप को दुरुस्त कराने की मांग की। उसके बाद सदस्यों ने हैंडंपप रीबोर कराने और नए हैंडपंप लगाने में धांधली की शिकायत शुरू कर दी।
यह भी बताया कि मुस्तफाबाद पेयजल योजना का काम आधे में ही छोड़ दिया गया और शेष रकम का गबन हो गया है। इस पर स्वास्थ्य मंत्री ने जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ मुकदमा दर्ज कराने को कहा। विधायक अजय राय ने कहा कि उनकी निधि से पिंडरा में पेयजल की लाइनें बिछाई गई हैं लेकिन पानी नहीं पहुंच रहा है। कहा कि अमौली बारी में भी काम पूरा नहीं हुआ है।
इस पर स्वास्थ्य मंत्री ने कहा कि जब तक कार्रवाई नहीं होगी तब तक अफसर सुधरेंगे नहीं। पेयजल समस्या पर पीडब्ल्यूडी राज्यमंत्री सुरेंद्र पटेल ने सभी हैंडपंपों को रीबोर कराने का प्रस्ताव रखा, जिसका सबने स्वागत किया। विधायक रविंद्र जायसवाल और पार्षद जगदीश त्रिपाठी ने जेएनएनयूआरएम के तहत पेयजल योजना पर सवाल उठाया और जांच की मांग की। बैठक में मछलीशहर सांसद रामचरित्र निषाद, एमएलसी चेतनारायण सिंह, जिला पंचायत अध्यक्ष सुजीत सिंह, विधायक महेंद्र पटेल, डीएम प्रांजल यादव आदि मौजूद थे।