वरुणा नदी के डूब क्षेत्र पर कब्जा करने वालों की खैर नहीं है। नदी के प्राकृतिक स्वरूप से छेड़छाड़ करने वालों पर प्रशासन का शिकंजा कसने लगा है। पहले सिंचाई विभाग ने 100 कब्जेदारों को नोटिस दिया। अब शुक्रवार को वरुणा कॉरिडोर में ग्रीन बेल्ट के लिए सीमांकन का काम प्रशासन ने शुरू कराया। नदी के दोनों किनारे पर पहले से गाड़े पिलर से 50-50 मीटर दूरी तक ग्रीन बेल्ट के लिए सीमांकन हो रहा है। इस निशान के दायरे में कई घर, प्लाट और होटल आ रहे हैं। निशान लगाने की कार्रवाई से वरुणा किनारे अतिक्रमण करने वालों की धड़कनें तेज हो गई हैँ। जल्द ही उनके अवैध निर्माण पर प्रशासन का हथौड़ा चलेगा। हालांकि इस दायरे से बाहर आने वालों के लिए यह राहत भरी पहल है।
नायब तहसीलदार सदर आनंद कन्नौजिया ने बताया कि शुक्रवार को डीएम बंगले से लेकर सूर्या होटल तक वीडीए, नगर निगम और राजस्व की टीम ने संयुक्त रूप से पैमाइश की। वरुणा कॉरिडोर में नदी किनारे दोनों ओर घोषित 50-50 मीटर ग्रीन बेल्ट के लिए निशान लगाया गया। इसमें जिन लोगों के निर्माण आ रहे हैं उनके नाम, पते और निर्माण का स्तर पूरी जानकारी वीडीए के अधिकारी नोट कर रहे हैं। सीमांकन का काम पूरा होने के बाद वीडीए के अधिकारी निर्माण के वैध-अवैध की जांच करेंगे। इसके बाद अवैध निर्माण गिराने की कार्रवाई वीडीए की ओर से की जाएगी।
भले ही अतिक्रमण करने वाले अपने अवैध निर्माण बचाने की जुगत करें लेकिन 50 मीटर के दायरे से बाहर वाले लोगों के लिए यह पहल राहत भरी है। जिस समय झेलम की तरह वरुणा नदी अपना विकराल रूप धरेगी, उस दौरान इन्हीं अवैध निर्माणों के चलते वैध तरीके से निर्माण कराने वाले बड़ी संख्या में प्रभावित होंगे। उन्हें विस्थापन का दंश भी झेलना पड़ सकता है। यदि नदी के डूब क्षेत्र के अवैध निर्माणों को हटा दिया जाएगा तो डूब क्षेत्र के बाहर रहने वालों पर कोई असर नहीं पड़ेगा।