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Varanasi News: छह महीने में मिले 14 अवैध नशा मुक्ति केंद्र, कार्रवाई एक पर भी नहीं; उठने लगे सवाल

Sun, 18 Jan 2026 04:43 PM IST
अमन विश्वकर्मा अमर उजाला नेटवर्क, वाराणसी।

सार

Varanasi News: वाराणसी में 50 से ज्यादा नशा मुक्ति केंद्र हैं। इनमें मात्र दो ही मानक का पालन कर रहे हैं। ऐसे में विभाग पर सवाल उठने लगे हैं। वहीं, अधिकारी के अनुसार, प्रशासन की ओर से अवैध नशा मुक्ति केंद्रों की जांच की जा रही है।
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नशा मुक्ति केंद्र। - फोटो : संवाद
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विस्तार
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जिले में 14 नशा मुक्ति केंद्रों को मद्यनिषेध और समाजोत्थान विभाग ने अवैध घोषित किया है। इसके बावजूद केंद्रों के खिलाफ 6 महीने में कोई कार्रवाई नहीं हुई है। विभाग की ओर से केवल खानापूर्ति की जा रही है। यह स्थिति तब है जब जिले में 50 से अधिक नशा मुक्ति केंद्र बिना मानक चल रहे हैं। केवल 2 केंद्रों में ही मानकों का पालन हो रहा है। 

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अवैध केंद्रों पर आए दिन मरीजों से मारपीट होती है। न तो विभाग की ओर से निगरानी की जाती है और न ही केंद्रों की ओर से ऑडिट रिपोर्ट विभाग को दी जाती है। चांदमारी के नशा मुक्ति केंद्र के संचालक पीयूष कुमार ने बताया कि मद्यनिषेध विभाग में स्टाफ की भारी कमी है। 

तीन अफसरों पर 10 जिलों की जिम्मेदारी

इनके पास छापा या फिर जांच के लिए टीम ही नहीं है। एक क्षेत्रीय अधिकारी, एक उपक्षेत्रीय अधिकारी और एक सहायक पर पूरे विभाग की जिम्मेदारी है। वाराणसी कार्यालय पर 10 जिलों, वाराणसी, गाज़ीपुर, चंदौली, बलिया, अयोध्या, अंबेडकरनगर, जौनपुर, मिर्जापुर, संत रविदासनगर और सोनभद्र की जिम्मेदारी है।

अधिकारी और लिपिक समेत 3 लोग इन 10 जिलों का कार्यभार संभाल रहे हैं। जागरुकता से लेकर कार्रवाई तक का जिम्मा यही 3 लोग संभालते हैं। अभियान में केंद्रों के संचालकों को भी बुलाया जाता है। कई बार तो ऐसी भी स्थिति होती है जब मरीजों के परिजन उन्हें नशा छुड़ाने के लिए केंद्रों पर भर्ती कराते हैं, लेकिन वहां की स्थिति देख कुछ ही दिन बाद वापस ले आते हैं।

प्रशासन की ओर से अवैध नशा मुक्ति केंद्रों की जांच की जा रही है। जांच पूरी होते ही कार्रवाई की जाएगी। अवैध कृत्यों की जानकारी प्रशासन को हुई है। - निर्मालिका सिंह, क्षेत्रीय मद्यनिषेध एवं समाजोत्थान अधिकारी।
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15 मरीजों को ही भर्ती करने की है अनुमति
चौबेपुर के नशा मुक्ति केंद्र के संचालक जितेंद्र प्रताप सिंह ने बताया कि एक केंद्र पर अधिकतम 15 मरीजों को ही भर्ती करने की अनुमति होती है। जबकि कई केंद्र संचालकों ने अपने यहां 30-40 मरीजों तक भर्ती कर रखा है। वह आए दिन मरीजों से मारपीट करते हैं। इसके अलावा परिजनों से मनचाहा पैसे ले रहे हैं।
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