इनके पास छापा या फिर जांच के लिए टीम ही नहीं है। एक क्षेत्रीय अधिकारी, एक उपक्षेत्रीय अधिकारी और एक सहायक पर पूरे विभाग की जिम्मेदारी है। वाराणसी कार्यालय पर 10 जिलों, वाराणसी, गाज़ीपुर, चंदौली, बलिया, अयोध्या, अंबेडकरनगर, जौनपुर, मिर्जापुर, संत रविदासनगर और सोनभद्र की जिम्मेदारी है।
अधिकारी और लिपिक समेत 3 लोग इन 10 जिलों का कार्यभार संभाल रहे हैं। जागरुकता से लेकर कार्रवाई तक का जिम्मा यही 3 लोग संभालते हैं। अभियान में केंद्रों के संचालकों को भी बुलाया जाता है। कई बार तो ऐसी भी स्थिति होती है जब मरीजों के परिजन उन्हें नशा छुड़ाने के लिए केंद्रों पर भर्ती कराते हैं, लेकिन वहां की स्थिति देख कुछ ही दिन बाद वापस ले आते हैं।
प्रशासन की ओर से अवैध नशा मुक्ति केंद्रों की जांच की जा रही है। जांच पूरी होते ही कार्रवाई की जाएगी। अवैध कृत्यों की जानकारी प्रशासन को हुई है। - निर्मालिका सिंह, क्षेत्रीय मद्यनिषेध एवं समाजोत्थान अधिकारी।
15 मरीजों को ही भर्ती करने की है अनुमति
चौबेपुर के नशा मुक्ति केंद्र के संचालक जितेंद्र प्रताप सिंह ने बताया कि एक केंद्र पर अधिकतम 15 मरीजों को ही भर्ती करने की अनुमति होती है। जबकि कई केंद्र संचालकों ने अपने यहां 30-40 मरीजों तक भर्ती कर रखा है। वह आए दिन मरीजों से मारपीट करते हैं। इसके अलावा परिजनों से मनचाहा पैसे ले रहे हैं।