एक तरफ चल रहा था वरुणा कॉरिडोर का काम तो दूसरी ओर हो रहा था कब्जा
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वरुणा नदी के एक किनारे पर कॉरिडोर के तहत पक्के घाट का निर्माण चल रहा था तो वहीं दूसरे किनारे पर इसी आड़ में डूब क्षेत्र पर कब्जा चल रहा था। भीमनगर में धीरे-धीरे डूब क्षेत्र को पाटकर वरुणा नदी की तलहटी में करीब पचास मीटर लंबी बाउंड्री बना दी गई। यह सारा काम डीएम आवास के पीछे ही हुआ लेकिन किसी ने भी इस कब्जे को रोकने की जहमत नहीं उठाई।
यह वाकया सपा सरकार के समय का है और मामला पूर्व सांसद सपा नेता जवाहर जायसवाल से जुड़ा होने के नाते संभवत: सभी जिम्मेदारों ने आंखें मूंदें रखीं। सिंचाई विभाग की मानें तो 1978 में बाढ़ का पानी जहां तक गया था वह नदी की जमीन है। मौजूदा हालात में नदी से करीब पचास मीटर दूर तक उसकी जमीन है। हालांकि सिंचाई विभाग के अधिकारियों का कहना है कि उन्हें इस निर्माण की जानकारी नहीं है।
वरुणा नदी की तलहटी में किए गए निर्माण के बाबत विकास प्राधिकरण ने बीते साल 28 अप्रैल को 763 लोगों को नोटिस दिया था। 125 लोगों को सिंचाई विभाग ने नोटिस भेजा था। भीमनगर में तलहटी पाटकर निर्माण कार्य कराने पर हीरालाल जायसवाल को भी नोटिस दिया गया था।
नोटिस पाने वालों की सूची में हीरालाल का पहला नाम था। अगर उसी समय आला अधिकारियों ने इसका संज्ञान लिया होता और काम रोक दिया गया होता तो वरुणा के इस हिस्से को बचाया जा सकता था। सिंचाई विभाग, नगर निगम, विकास प्राधिकरण और प्रशासन ने आंखें मूंदे रखीं और करीब पचास मीटर तक वरुणा की तलहटी को पाटकर ऊंची बाउंड्री बना दी गई।
नोटिस जारी हुए एक साल बीत गया लेकिन विकास प्राधिकरण ने कोई रिमाइंडर नहीं भेजा। अब उस जमीन पर आलीशान होटल बनाने की तैयारी है। एसीएम चतुर्थ त्रिभुवन ने 27 मई को डीएम और कमिश्नर को जांच रिपोर्ट दी है।
दरअसल तलहटी के पास ही नगर निगम की करीब डेढ़ बीघा जमीन को हीरालाल जायसवाल के पक्ष में विनिमय का आदेश कर दिया गया। एसीएम ने इस प्रक्रिया को अवैध बताते हुए जमीन को नगर निगम के अधीन करने की रिपोर्ट दी है।