उन्होंने कहा कि बदलते भारत में युवाओं के सामने अवसरों की कोई कमी नहीं है। हालांकि इन अवसरों को उपलब्धियों में बदलने के लिए मेहनत, साहस और दूरदृष्टि जरूरी है। विद्यार्थियों को अपने करियर को केवल नौकरी हासिल करने तक सीमित नहीं रखना चाहिए, बल्कि देश और समाज के विकास में योगदान देने की सोच के साथ आगे बढ़ना चाहिए।
बिड़ला ने कहा कि तकनीक, युवा आबादी, उद्यमिता और बढ़ती महत्वाकांक्षाएं मिलकर ऐसे अवसर पैदा कर रही हैं, जिनकी कल्पना पिछली पीढ़ियां भी नहीं कर सकती थीं। भारत के अगले 25 साल बेहद निर्णायक साबित होंगे। इसी तरह दीक्षांत समारोह में स्नातक हो रहे विद्यार्थियों के जीवन और करियर के अगले 25 साल भी उनके भविष्य की दिशा तय करेंगे। उनके सामने संभावनाओं का विशाल संसार खुला है। जरूरत है कि वे आत्मविश्वास के साथ अपने लक्ष्य चुनें और उन्हें हासिल करने के लिए निरंतर प्रयास करें।