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आईआईटी दीक्षांत: मंगलम बिड़ला ने दिए मंत्र, कहा- रिस्क नहीं तो इश्क नहीं; बीएचयू विश्वनाथ का दर्शन-पूजन किया

Sat, 31 Oct 2026 02:31 PM IST
Aman Vishwakarma अमर उजाला नेटवर्क, वाराणसी।

सार

आईआईटी बीएचयू के 15वें दीक्षांत समारोह में कुमार मंगलम बिड़ला ने युवाओं को जोखिम उठाने, अपने फैसले खुद लेने और बड़े सपने देखने का संदेश दिया। उन्होंने कहा कि भारत के अगले 25 साल निर्णायक होंगे। तकनीक, उद्यमिता और युवा आबादी नए अवसर पैदा कर रही हैं, जिन्हें मेहनत और दूरदृष्टि से उपलब्धियों में बदलना होगा।
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बीएचयू स्थित विश्वनाथ मंदिर में पूजन करते आदित्य बिड़ला समूह के चेयरमैन कुमार मंगलम। - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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आईआईटी बीएचयू के 15वें दीक्षांत समारोह में आदित्य बिड़ला समूह के चेयरमैन कुमार मंगलम बिड़ला ने युवाओं को सफलता के लिए जोखिम उठाने, अपने फैसले खुद लेने और बड़े सपने देखने का मंत्र दिया। करीब 25 मिनट के दीक्षांत संबोधन में उन्होंने उद्योग जगत में अपनी पहचान बनाने के संघर्ष और अनुभवों को रोचक कहानियों के माध्यम से विद्यार्थियों के सामने रखा। उन्होंने कहा कि शुरुआत करने के लिए इससे रोमांचक समय कोई दूसरा नहीं हो सकता, खासकर भारत जैसे देश में। आने वाले 25 साल भारत की वैश्विक पहचान को बदलने की क्षमता रखते हैं।

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कुमार मंगलम बिड़ला ने कहा कि जिंदगी में अपने फैसले खुद लेने का साहस बनाए रखना चाहिए। जोखिम उठाए बिना कुछ बड़ा हासिल नहीं किया जा सकता। युवाओं को असफलता के डर से पीछे नहीं हटना चाहिए, बल्कि चुनौतियों को अवसर में बदलने की कोशिश करनी चाहिए। उन्होंने अपने संदेश को फिल्मी संवादों से भी जोड़ा। 'अपना टाइम आएगा', 'रिस्क नहीं तो कुछ नहीं' और 'जिंदगी बड़ी होनी चाहिए, लंबी नहीं' जैसे लोकप्रिय संवादों का उल्लेख करते हुए उन्होंने इन्हें जीवन के अनुभवों से जोड़कर समझाया।

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छात्रों से की बातचीत

उन्होंने कहा कि बदलते भारत में युवाओं के सामने अवसरों की कोई कमी नहीं है। हालांकि इन अवसरों को उपलब्धियों में बदलने के लिए मेहनत, साहस और दूरदृष्टि जरूरी है। विद्यार्थियों को अपने करियर को केवल नौकरी हासिल करने तक सीमित नहीं रखना चाहिए, बल्कि देश और समाज के विकास में योगदान देने की सोच के साथ आगे बढ़ना चाहिए।

बिड़ला ने कहा कि तकनीक, युवा आबादी, उद्यमिता और बढ़ती महत्वाकांक्षाएं मिलकर ऐसे अवसर पैदा कर रही हैं, जिनकी कल्पना पिछली पीढ़ियां भी नहीं कर सकती थीं। भारत के अगले 25 साल बेहद निर्णायक साबित होंगे। इसी तरह दीक्षांत समारोह में स्नातक हो रहे विद्यार्थियों के जीवन और करियर के अगले 25 साल भी उनके भविष्य की दिशा तय करेंगे। उनके सामने संभावनाओं का विशाल संसार खुला है। जरूरत है कि वे आत्मविश्वास के साथ अपने लक्ष्य चुनें और उन्हें हासिल करने के लिए निरंतर प्रयास करें।
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