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आईआईटी बीएचयू की छात्रा से दुष्कर्म का मामला: गवाह की तबीयत बिगड़ी, नहीं हो सकी गवाही, 18 को फिर सुनवाई

Thu, 17 Sep 2026 10:53 AM IST
Pragati Chand अमर उजाला नेटवर्क, वाराणसी।

सार

आईआईटी बीएचयू की छात्रा से सामूहिक दुष्कर्म के मामले में बुधवार को सुनवाई हुई। इस दौरान एक गवाह ही अदालत में उपस्थित हो सका। दूसरा गवाह नहीं आया। ऐसे में 18 सितंबर को अलगी सुनवाई की तारीख तय की गई।
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सामूहिक दुष्कर्म के तीन आरोपी - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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वाराणसी में फास्टट्रैक (प्रथम) के न्यायाधीश कुलदीप सिंह की अदालत में बुधवार को आईआईटी बीएचयू की छात्रा से सामूहिक दुष्कर्म मामले की सुनवाई हुई। आरोपियों की तरफ से सफाई साक्ष्य के लिए दो गवाहों को पेश किया जाना था लेकिन एक गवाह ही अदालत में उपस्थित हो सका। दूसरा गवाह नहीं आया। जो गवाह उपस्थित हुआ उसने भी तबीयत खराब होने का हवाला देकर बयान नहीं दर्ज कराया। अब मामले की सुनवाई 18 सितंबर को होगी। 

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पिछली सुनवाई के दौरान आरोपी कुणाल पांडेय और सक्षम पटेल की तरफ से सफाई साक्ष्य के लिए दो गवाहों को तलब करने का अनुरोध किया गया था। अदालत ने प्रार्थना पत्र स्वीकार करते हुए गवाहों को तलब किया था। सुनवाई के दौरान तीनों आरोपी अपने अधिवक्ता के साथ अदालत में उपस्थित रहे। 

एडीजीसी मनोज गुप्ता के अनुसार, दो नवंबर 2023 की रात बीएचयू परिसर में आईआईटी की छात्रा के साथ बाइक सवार तीन युवकों ने सामूहिक दुष्कर्म किया था। छात्रा की तहरीर पर लंका थाने में प्राथमिकी दर्ज हुई थी। 
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विवेचना के दौरान सुंदरपुर स्थित बृज एन्क्लेव कॉलोनी निवासी कुणाल पांडेय, जिवधिपुर-बजरडीहा निवासी आनंद उर्फ अभिषेक चौहान और सक्षम पटेल के नाम प्रकाश में आए। पुलिस ने आरोपियों के खिलाफ आरोप पत्र तैयार किया और अदालत में दाखिल कर दिया। अब अदालत सुनवाई कर रही है। 

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कांग्रेस नेता राहुल गांधी मामले में प्रति आपत्ति दाखिल
कांग्रेस सांसद और लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी सहित अन्य के खिलाफ दाखिल परिवाद में याचिकाकर्ता हरिशंकर पांडेय ने बुधवार को प्रति आपत्ति दाखिल की है। एसीजेएम चतुर्थ (एमपी/एमएलए) की अदालत में दाखिल प्रति आपत्ति में कांग्रेस नेता के अधिवक्ताओं के वकालतनामा की वैधता पर सवाल उठाए गए। कहा गया कि राहुल गांधी ने नफरत फैलाने वाला बयान दिया था। इस मामले में नौ जुलाई को विपक्ष के अधिवक्ताओं ने आपत्ति, वकालतनामा और आधार कार्ड दाखिल किया था। इसमें सेंट्रल बार एसोसिएशन और बनारस बार एसोसिएशन के वकालतनामा पर विपक्षियों या उनके मुख्तारआम के हस्ताक्षर नहीं हैं इसलिए इसे पोषणीय नहीं माना जाना चाहिए। 
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