उन्होंने बताया कि जो अल्ट्रावायलेट फ्लोरोसेंट स्याही तैयार की गई है उसका उपयोग कागज पर किया जाता है, तो यह दिन के उजाले में नहीं दिखाई देती है।
जनवरी में ही शुरू किया शोध
विशाल मिश्रा ने बताया कि अपनी टीम के साथ इस साल जनवरी में ही इस शोध को शुरू किया। अक्तूबर में पेटेंट भी स्वीकृत हो गया है।अब आईसीएमआर,डीएसटी,डीबीटी आदि जगहो पर इसे भेजने की योजना है, जिससे कि इस दिशा में आगे काम किया जा सके।
360 नैनोमीटर अल्ट्रा वायलेट में हो सकेगी पहचान
शोध करने वाले विशाल मिश्रा ने बताया कि फ्लोरेसेंट स्याही लगे नोट और मार्कशीट को 360 नैनो मीटर अल्ट्रा वायलेट में आसानी से देखा जा सकता है। इसकी लागत भी बहुत कम है। इस स्याही के इस्तेमाल से न केवल नकली नोटों के बारे में जानकारी मिल पाएगी बल्कि मार्कशीट सहित अन्य जाली कागजातों को भी आसानी से पकड़ा जा सकता है।