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IIT BHU Research: आईआईटी का सेंसर बताएगा हड्डी का कैंसर, स्मार्टफोन से भी होगी जांच; यूके में प्रकाशित हुआ शोध

Wed, 25 Jun 2025 12:40 PM IST
प्रगति चंद अमर उजाला नेटवर्क, वाराणसी।

सार

Varanasi News: आईआईटी बीएचयू ने रिपोर्टिंग डायग्नोस्टिक डिवाइस विकसित किया है। ऐसे में सेंसर के जरिये हड्डी के कैंसर का पता लगाया जा सकेगा। 
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प्रांजल चंद्रा, दफिका एस दखर, सुप्रतिम - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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आईआईटी बीएचयू ने एक प्रोटोटाइप सेंसर तैयार किया है, जो हड्डी के कैंसर को गंभीर होने से पहले ही सूचित कर देगा। एक ऐसी सेल्फ-रिपोर्टिंग डायग्नोस्टिक डिवाइस विकसित की गई है, जिससे हड्डी के कैंसर की शुरुआती पहचान होगी। अब इस प्रोटोटाइप को एक यूजर-फ्रेंडली डायग्नोस्टिक किट के तौर पर विकसित किया जा रहा है, ताकि इसे स्मार्टफोन से जोड़कर दूर-दराज इलाकों में स्वास्थ्य सेवा की शुरुआत की जा सके। 

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यह शोध प्रतिष्ठित अंतरराष्ट्रीय शोध पत्रिका नैनो स्केल (रॉयल सोसायटी ऑफ केमिस्ट्री, यूके) में प्रकाशित हो चुका है। साथ ही वैज्ञानिकों ने पेटेंट आवेदन फाइल कर दिया है। ये अध्ययन प्रो. प्रांजल चंद्रा, दफिका एस दखर और सुप्रतिम महापात्रा ने किया है। सोने और रेडॉक्स-एक्टिव नैनो मैटेरियल के मिश्रण से एक उन्नत सेंसर सतह का विकास किया। ग्रामीण प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों में भी आसानी से उपयोग में लाया जा सकता है।

बच्चों-किशोरों में ये समस्या बड़ी है

मिनिएचर (सूक्ष्म) बायोइलेक्ट्रॉनिक डिवाइस को किट भी कहा जा सकता है। ओपीएन नाम के एक बायोमार्कर का पता लगाया गया है, जो हड्डी के कैंसर के लिए जिम्मेदार होता है। इसे ऑस्टियोसारकोमा कहा जाता है जो कि पीड़ित बच्चों और किशोरों में काफी ज्यादा होता है। प्रो. चंद्रा ने कहा, मौजूदा जांच विधियों की मुश्किलों को कम कर बीमारी पहचानने के समय को घटाया जा सकता है। यह तकनीक कई जैविक मार्कर की पहचान के लिए एक प्लेटफॉर्म टेक्नोलॉजी बन सकती है।

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''प्रिसिजन मेडिसिन'' की दिशा में बड़ा कदम

निदेशक प्रो. अमित पात्रा ने कहा कि यह शोध ‘मेक इन इंडिया’ और ‘स्टार्ट-अप इंडिया’ जैसी राष्ट्रीय पहलों के उद्देश्यों के अनुरूप है। उन्होंने कहा कि यह शोध ''प्रिसिजन मेडिसिन'' की दिशा में एक सार्थक कदम है। यह नवाचार, कैंसर की समय रहते पहचान, व्यक्तिगत उपचार योजना और सतत निगरानी में अहम भूमिका निभा सकता है।
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