फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

IIT BHU में ‘काशी यात्रा’ का आगाज, आइआईटियंस ने मचाया धमाल

Fri, 19 Jan 2018 10:51 AM IST
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, वाराणसी
विज्ञापन
21 तक दिखेगा कला, साहित्य, संस्कृति का अनूठा संगम - फोटो : अमर उजाला
विज्ञापन
आईआईटी बीएचयू के वार्षिक सांस्कृतिक महोत्सव ‘काशी यात्रा’ का हिस्सा बनने दिल्ली, पटना, सूरत, अहमदाबाद, रायपुर, इलाहाबाद आदि जगहों से आईआईटियंस गुरुवार को बनारस पहुंचे। मुख्य आयोजन भले ही 19 जनवरी से शुरू होंगे लेकिन गुरुवार को उद्घाटन समारोह से पहले रिहर्सल में ही प्रतिभागियों ने फैशन शो में कैटवॉक, नृत्य आदि की प्रस्तुति से धमाल मचाया।
विज्ञापन


उधर शाम को जाने माने कवियों ने अपने काव्य पाठ से युवाओं को गुदगुदाने के साथ ही देश और समाज में व्याप्त कुरीतियों को न केवल दर्शाया बल्कि युवाओं का आह्वान किया कि वह इसके लिए आगे आए। 

स्वतंत्रता भवन में शाम छह बजे उदघाटन समारोह से पहले दिन में अलग-अलग जगहों से आए प्रतिभागियों ने रंग बिरंगे परिधानों के साथ मंच पर उतरकर अपनी प्रतिभा का जादू बिखेरकर खूब वाहवाही लूटी। रैंप पर कैटवॉक के साथ ही गीतों पर ठुमके भी लगाए।
विज्ञापन


उधर उदघाटन अवसर पर बतौर मुख्य अतिथि क्लचरल रिसोर्स एंड ट्रेनिंग सेंटर के डिप्टी डायरेक्टर डॉ. चेतन सिंह ने छात्रों को इसके लिए बधाई देते हुए कहा कि जीवन के किसी भी क्षेत्र में रहिए, अनुशासन के साथ आगे बढ़ते रहने की जरूरत है।

उन्होंने इस तरह के आयोजनों में बढ़चढ़कर भागीदारी करने का आह्वान किया। अधिष्ठाता छात्र कल्याण प्रो. बीएन राय ने काशीयात्रा के आयोजन के बारे में विस्तार से बताया।

अध्यक्षता करते हुए निदेशक प्रो. राजीव संगल ने कहा कि काशी यात्रा एक ऐसा उत्सव है, जिसमें सबकी सहभागिता, श्रेष्ठता और सार्थकता जरूरी है। सांस्कृतिक परिषद के चेयरमैन डॉ. केके सिंह ने अतिथियों के साथ ही सभी सहयोगियों के प्रति आभार जताया। 
विज्ञापन

काव्य मंजरी में कवियों ने सुनाई कविता

आईआईटी बीएचयू में काव्यमंजरी के साथ महोत्सव का आगाज - फोटो : अमर उजाला
काशीयात्रा का आगाज गुरुवार को काव्यमंजरी के साथ हुआ। इस दौरान मेरठ से पॉपुलर मेरठी, हरदोई से सर्वेश अस्थाना, प्रतापगढ़ से भुवन मोहिनी, अलीगढ़ से विष्णु सक्सेना के अलावा अभय निर्भीक ने अपनी रचनाओं के माध्यम से श्रोताओं में अमिट छाप छोड़ी। सम्मेलन की शुरूआत अभय निर्भीक ने अपनी कविता शांति मंत्र की माला जपकर केवल ये ही पाया है, सेना पर पत्थर बरसे हैं सैनिक का शव आया के माध्यम से सीमा पर छिड़ी जंग की कहानी बयां की। 

स्वतंत्रता भवन सभागार में सम्मेलन में निर्भीक ने दूसरी कविता सच कहता हूं कभी उठेगा अलग देश का नाम नहीं, सेना पर पत्थर ना होंगे, खूनी होगी शाम नहीं, एक बार बस हिम्मत करके कानूनी पुरस्तक में लिख दो धारा 370 का है काश्मीर का नाम नहीं के माध्यम से धारा 370 की ओर से सभी का ध्यान आकृष्ट किया।

इसके बाद डॉ. विष्णु सक्सेना ने तु हवा है तो कर ले अपने हवाले मुझको, इससे पहले कि कोई और बहा ले मुझको, आईना बन के गुजारी है जिंदगी मैने टूट कर बिखर जाउंगा बचा ले मुझको के माध्यम से संघर्षमयी जीवन की गाथा प्रस्तुत की।

लखनऊ से आए डॉ. सर्वेश अस्थाना ने पुल बहुत रोया गिड़गिड़ाया कि मेरे हिस्से बहुत कम सीमेंट और लोहा आया के माध्यम से निर्माण कार्य की गुणवत्ता पर सवाल खड़ा किया। इसके अलावा उन्होंने किसी गिरगिट की नेता से तुलना करना महापाप है क्योंकि रंग बदलने में नेता गिरगिट का बाप है। इस दौरान पूरा स्वतंत्रता भवन सभागार खचाखच भरा रहा और छात्र-छात्राओं के अलावा प्रोफेसर मौजूद रहे। 
और पढ़ें...
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें