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IAS Success Story: नौकरी के साथ तैयारी और लिखित परीक्षा बड़ी चुनौती, लक्ष्य के पीछे भागना जरूरी

Fri, 02 May 2025 11:40 AM IST
प्रगति चंद अमर उजाला नेटवर्क, वाराणसी।

सार

IAS Success Story: यूपीएससी में 18वीं रैंक प्राप्त करने वाली सौम्या मिश्रा ने बताया कि कर्तव्य और तैयारी दोनों में ईमानदारी जरूरी है। वहीं आईपीएस अवनीश सिंह ने कहा कि दिनभर की ट्रेनिंग के बाद बाकी समय पढ़ाई में गुजरा। 
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सौम्या मिश्रा, हेमंत मिश्रा, अभिषेक सिंह, अवनीश सिंह। - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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यूपीएससी में पूर्वांचल का दबदबा रहा। टॉप 20 में मिर्जापुर और बनारस के ही तीन अभ्यर्थी रहे। बीएचयू की छात्रा शक्ति दुबे की पहली रैंक थी। मिर्जापुर के हेमंत मिश्रा को 13वीं और सौम्या मिश्रा को 18वीं रैंक मिली। वहीं, जौनपुर के अभिषेक सिंह ने 78वीं रैंक हासिल की।

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यूपीएससी की परीक्षा में 18वीं रैंक हासिल करने वाली मिर्जापुर की सौम्या मिश्रा ने बताया कि यूपीएससी की पढ़ाई के दौरान सबसे बड़ी चुनौती नौकरी के साथ सेल्फ स्टडी की रही। एसडीएम मड़िहान के पद पर रहते हुए वहां के कर्तव्यों के साथ पढ़ाई में भी ईमानदारी का साथ नहीं छोड़ा। ये बड़ा टास्क था। जब भी मौका मिलय, किताब उठा लिया। फील्ड में कहीं जाते वक्त या काम खत्म करने के बाद। सोने से पहले, सोकर उठने पर जब भी मौका मिला, नोट्स पढ़ती रहती थी।

उन्होंने बताया कि कई युवा यूपीएससी के ग्लैमर के पीछे पड़कर लक्ष्य से भटक जाते हैं। मेरा मानना है कि लक्ष्य का पीछा करिए न कि ग्लैमर का। अपनी कमियों को दूर करने पर फोकस रहना चाहिए। सौम्या मिश्रा उन्नाव की मूल निवासी हैं। उनके पिता राघवेंद्र मिश्रा लेक्चरर हैं। मां रेनू मिश्रा गृहिणी हैं। एक छोटी बहन और भाई हैं। उनकी बहन सुमेघा मिश्रा ने भी यूपीएससी 2025 में 253वीं रैंक हासिल की है।

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एसडीएम बनकर 10 महीने से कर रहे थे तैयारी
सिविल सेवा परीक्षा में 13वीं रैंक हासिल करने वाले हेमंत मिश्रा बक्सर के मूल निवासी हैं। उन्होंने 2023 में पीसीएस परीक्षा पास की थी। पहली पोस्टिंग मिर्जापुर में थी और 10 महीने से वह जिले में एसडीएम के तौर पर अपनी सेवाएं दे रहे थे। उन्होंने कहा कि हर वक्त मेहनत की है। कई लोग सिर्फ दिखावा करते हैं। अपनी निरंतरता को बनाए रखना ही जीवन की सबसे बड़ी चुनौती रही। हेमंत ने पिता ओम प्रकाश मिश्रा और माता नम्रता मिश्रा को सफलता का श्रेय दिया। पिता शिक्षा विभाग में हैं।

उत्तर लिखना सबसे बड़ी चुनौती
जौनपुर स्थित बदलापुर क्षेत्र के ढेमा गांव से यूपीएससी में 78वीं रैंक पाने वाले अभिषेक सिंह ने कहा कि सबसे बड़ी चुनौती मेंस का पेपर है। इसमें क्या नहीं लिखना है, ये पता होना चाहिए। कॉपी में संतुलन दिखे। तथ्यों और विचारों के बीच एकेस स्टडी भी हो। अभिषेक ने कहा कि पढ़ाई का कभी प्रेशर नहीं लेना चाहिए। मौज मस्ती के साथ पढ़ाई करें। जिस दिन आपने खुद को तनाव दिया, उसी दिन से आपकी तैयारी पिछड़ने लगती है। सेल्फ स्टडी सबसे अहम है, इसे गुणवत्तापरक बनाएं। अभिषेक को तैयारी में कुल साढ़े चार साल लगे। चौथे प्रयास में सफलता मिली।
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आईपीएस की ट्रेनिंग करते हुए मिली 148वीं रैंक
आईपीएस ट्रेनिंग के साथ सिविल सर्विसेज की परीक्षा निकालना बड़ी चुनौती थी। हैदराबाद में दिनभर की ट्रेनिंग के बाद बाकी समय पढ़ाई में गुजरा। ये कहना है कि 148वीं रैंक लाने वाले मिर्जापुर के खुटहां मौनस गांव निवासी अवनीश सिंह का। अवनीश सिंह ने 2023 में आईपीएस के लिए क्वालिफाई किया था और अब ट्रेनिंग कर रहे थे। ये उनका पढ़ाई जारी रखने का नतीजा ही है कि उन्होंने सिविल परीक्षा में अपने रैंक को और बेहतर किया। अवनीश की माता आशा सिंह गृहिणी हैं। अवनीश ने बताया कि आप जो भी सपने देखिए तब तक उसका पीछा करिए जब तक कि उसे हासिल न कर लें।

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