फर्जीवाड़ा करके 35 साल पहले दोनाली बंदूक का लाइसेंस प्राप्त करने के मामले में बृहस्पतिवार को आरोपी मुख्तार अंसारी के खिलाफ विशेष न्यायाधीश (एमपी-एमएलए) अवनीश गौतम की अदालत में सुनवाई हुई। मुख्तार अंसारी के अधिवक्ता ने अपनी बहस पूरी। इस पर अदालत ने जवाब देने के लिए अभियोजन पक्ष को अवसर देते हुए सुनवाई की अगली तिथि छह फरवरी नियत कर दी।
मुख्तार अंसारी की ओर से दलील दी गई कि उसके द्वारा कोई अवैध कृत्य नहीं किया गया और न षड्यंत्र करके किसी से अवैध कृत्य कराया गया। यह भी साक्ष्य नहीं है कि लिपिक को पैसा देकर अवैध कृत्य कराया गया। पत्रावली पर आईएएस और आईपीएस रैंक के अधिकारियों का साक्ष्य है, लेकिन किसी ने यह नहीं बताया कि कौन सा अवैध कृत्य आरोपी द्वारा किया गया। अधिकारी सिर्फ यह बताते हैं कि उनके द्वारा कोई अवैध कृत्य नहीं किया गया। जबकि, तत्कालीन जिलाधिकारी के तत्कालीन कार्यालय अधीक्षक गौरी शंकर श्रीवास्तव का बयान विवेचक ने दर्ज किया है कि डीएम, एसडीएम और एसपी के हस्ताक्षर वैधानिक रूप से मुख्तार अंसारी के लाइसेंस के आवेदन पर कराए गए थे। शस्त्र लाइसेंस के लिए आवेदन देना अपराध नहीं है। सुनवाई के दौरान सीबीसीआईडी के अभियोजन अधिकारी उदय राज शुक्ल, एडीजीसी विनय कुमार सिंह भी रहे।
प्रकरण के अनुसार, मुख्तार अंसारी पर आरोप है कि 10 जून 1987 को दोनाली बंदूक के लाइसेंस के लिए जिला मजिस्ट्रेट के यहां प्रार्थना पत्र दिया था। जिलाधिकारी और पुलिस अधीक्षक के फर्जी हस्ताक्षर से शस्त्र लाइसेंस प्राप्त कर लिया गया था। फर्जीवाड़ा उजागर होने पर सीबीसीआईडी द्वारा चार दिसंबर 1990 को गाजीपुर के मुहम्मदाबाद थाने में मुख्तार अंसारी, तत्कालीन डिप्टी कलेक्टर समेत पांच नामजद और अन्य अज्ञात के खिलाफ मुकदमा दर्ज कराया गया।