वाराणसी के कचहरी परिसर में गुरुवार को एक अजीबोगरीब वाकया देखने को मिला। एक 'मुर्दा' नामांकन करने पहुंचा। मुर्दे को देखकर सब आश्चर्य में पड़ गए। आगे की स्लाइड में देखें कौन है ये मुर्दा और क्या है उसकी कहानी...
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संतोष मूरत
- फोटो : अमर उजाला
खुद को जिंदा साबित करने के लिए गले में ‘मैं जिंदा हूं’ की तख्ती लटकाए करीब दस साल तक संघर्ष करने वाले संतोष मूरत सिंह ने बुधवार को शिवपुर विधानसभा सीट से निर्दलीय उम्मीदवार के तौर पर नामांकन किया।
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संतोष मूरत
- फोटो : अमर उजाला
वाराणसी के चौबेपुर क्षेत्र निवासी संतोष मूरत वर्षों पूर्व घर बार छोड़ कर मुंबई चले गए थे। मुंबई में वह फिल्म अभिनेता नाना पाटेकर के घर खाना बनाने का काम करते थे। उनके मुंबई रहने के दौरान ही गांव के लोगों ने उन्हें राजस्व संबंधी कागजात में मृत दिखाकर उनकी जमीन हड़प ली।
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संतोष मूरत
- फोटो : अमर उजाला
वाराणसी के पूर्व डीएम प्रांजल यादव के मामला संज्ञान में आने के बाद राजस्व कागजात में उनका नाम चढ़ा और वह जिंदा माने जाने लगे। हालांकि अब भी लोग उन्हें ‘मैं जिंदा हूं’ के नाम से ही जानते हैं।
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संतोष मूरत
- फोटो : अमर उजाला
खुद को जिंदा साबित करने के लिए उन्होंने एक बार राष्ट्रपति के चुनाव के लिए भी नामांकन किया लेकिन तकनीकी कारणों से पर्चा मंजूर नहीं हो सका। उसके बाद वो 2012 में जंतर-मंतर पर धरने पर बैठकर न्याय की मांग करने लगे। पूरे देश में वो उस वक्त चर्चा का विषय थे।
बनारस की गलियों से लेकर देश की राजधानी दिल्ली के जंतर-मंतर तक यह शख्स सरकार का ध्यान आकर्षित करने के लिए गले में तख्ती टांगकर न्याय की मांग किया है। उस दौरान वो कहते थे, मुंबई में 2006 में हुए बम धमाके में मैं नहीं मरा हूं, मैं जिंदा हूं, मेरी मदद करिए।