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बौद्ध की तपोस्थली से उच्च शिक्षा में मानवीय मूल्यों की वकालत, देश में स्थापित हों 10 गुरुकुल

Tue, 20 Mar 2018 10:30 AM IST
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, वाराणसी
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dalai lama - फोटो : अमर उजाला
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बौद्ध की तपोस्थली सारनाथ से सोमवार को शिक्षा में शांति व मानवीय मूल्यों को समाहित करने का संदेश दिया गया। पहली बार काशी में आयोजित भारतीय विश्वविद्यालय संघ के अधिवेशन की मेजबानी केंद्रीय उच्च तिब्बती अध्ययन संस्थान सारनाथ ने की।
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देश भर से आए 150 कुलपति व शिक्षाविदों ने यहां वर्तमान शिक्षा पद्धति और इसमें किए जाने वाले बदलाव व रणनीति पर चर्चा की। उच्च शिक्षा में तकनीकी, इनोवेशन, कौशल के साथ मानवीय मूल्यों का समावेश करने की वकालत की गई।

भारतीय विश्वविद्यालय संघ के अध्यक्ष प्रो. पीबी शर्मा ने कहा कि शिक्षा के क्षेत्र में भारत का गौरवशाली इतिहास रहा है। उन्होंने कहा कि सरकार के समक्ष संघ ने ये प्रस्ताव रखा है कि देश में कम से कम दस गुरुकुल स्थापित किए जाएं, जहां सत्यमेव जयते व विचार और कार्य में शुद्धता का पाठ पढ़ाया जाए।
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यहां की शिक्षा शांति, सौहार्द के साथ ही वैश्विक शांति और सतत विकास के एजेंडे पर निर्धारित हो। इनोवेशन इंक्यूबेशन सेंटर के साथ ही ह्यूमन डेवलपमेंट सेंटर शुरू किए जाएं। कहा कि भारत रसायन शास्त्र के उच्चस्तरीय प्रकाशनों में चौथे नंबर पर है, बावजूद इन शोध लेखों का उपयोग नहीं हो रहा है। इसलिए हमें अपने शोध को समाधान मूलक बनाना चाहिए।

विश्व बैंक के उच्च शिक्षा समन्वयक प्रो. फ्रांसिस्को मार्मोल्जो ने कहा कि वर्तमान उच्च शिक्षा ऐसी हो जो विद्यार्थियों में स्व अनुशासित, विश्वसनीय, सत्यनिष्ठ जैसे कौशल विकसित करे। कहा कि उच्च शिक्षा मनुष्य के सुधार का अंतिम अवसर होती है।

हम ज्यादा लोगों को उच्च व गुणवत्ता परक शिक्षा दें, ये हमारा उद्देश्य होना चाहिए। संघ के महासचिव प्रो. फुरकान कमर ने बताया कि देश भर के 858 शिक्षण संस्थानों में 682 संस्थान संघ के सदस्य हैं। जल्द ही आईआईएम भी हमारा सदस्य होगा।
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इन्होंने ये कहा

भारतीय विश्वविद्यालय संघ के अधिवेशन - फोटो : अमर उजाला
लखनऊ स्थित भीमराव अंबेडकर विश्वविद्यालय के कुलपति  प्रो. आरसी सोबती ने कहा कि स्वच्छ भारत अभियान, मेक इन इंडिया, स्किल इंडिया जैसे अभियानों को परवाज देने के लिए जरूरी है कि शिक्षा पद्धति में बदलाव हो। शिक्षा के क्षेत्र में भारत ने आदर्श स्थापित किया है। हम पश्चिम की शिक्षा पद्धति को कॉपी करने के बजाय हमें अपने ज्ञान कौशल का इस्तेमाल करना होगा। 

महात्मा गांधी काशी विद्यापीठ के कुलपति डॉ. पृथ्वीश नाग ने कहा कि  हम आधुनिक शिक्षा में आगे बढ़ें और अपने मूल्यों के साथ भी जुड़े रहें, ये बेहद जरूरी है। अपनी शिक्षा पद्धति में हमें भारतीय पारंपरिक ज्ञान को समाहित करना होगा। गांधियन स्टडीज के जरिये हमने अपने विश्वविद्यालय में इसकी शुरुआत कर दी है।

नेशनल लॉ यूनिवर्सिटी पंजाब के कुलपति प्रो. परमजीत सिंह जायसवाल ने कहा कि  पाठ्यक्रम में हमें वृहद स्तर पर बदलाव लाने की जरूरत है। इस अधिवेशन में इस मुद्दे पर गहन विमर्श किया गया है। विज्ञान व तकनीकी विध्वंसक रूप में ना इस्तेमाल हो, इसके लिए हमें इसमें मानवीय मूल्यों का समावेश करना जरूरी है।

पद्मावती विमेंन यूनिवर्सिटी, तिरुपति की कुलपति प्रो. वी दुर्गा भवानी ने कहा कि  शिक्षा पद्धति में निरंतर बदलाव करते रहने की जरूरत है। पाठ्यक्रम ऐसा हो जो इनोवेशन और स्किल को बढ़ावा दे। शिक्षा रोजगार परक होने के साथ ऐसी हो जो विद्यार्थियों को एक बेहतर इंसान बनाए।
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