बौद्ध की तपोस्थली सारनाथ से सोमवार को शिक्षा में शांति व मानवीय मूल्यों को समाहित करने का संदेश दिया गया। पहली बार काशी में आयोजित भारतीय विश्वविद्यालय संघ के अधिवेशन की मेजबानी केंद्रीय उच्च तिब्बती अध्ययन संस्थान सारनाथ ने की।
देश भर से आए 150 कुलपति व शिक्षाविदों ने यहां वर्तमान शिक्षा पद्धति और इसमें किए जाने वाले बदलाव व रणनीति पर चर्चा की। उच्च शिक्षा में तकनीकी, इनोवेशन, कौशल के साथ मानवीय मूल्यों का समावेश करने की वकालत की गई।
भारतीय विश्वविद्यालय संघ के अध्यक्ष प्रो. पीबी शर्मा ने कहा कि शिक्षा के क्षेत्र में भारत का गौरवशाली इतिहास रहा है। उन्होंने कहा कि सरकार के समक्ष संघ ने ये प्रस्ताव रखा है कि देश में कम से कम दस गुरुकुल स्थापित किए जाएं, जहां सत्यमेव जयते व विचार और कार्य में शुद्धता का पाठ पढ़ाया जाए।
यहां की शिक्षा शांति, सौहार्द के साथ ही वैश्विक शांति और सतत विकास के एजेंडे पर निर्धारित हो। इनोवेशन इंक्यूबेशन सेंटर के साथ ही ह्यूमन डेवलपमेंट सेंटर शुरू किए जाएं। कहा कि भारत रसायन शास्त्र के उच्चस्तरीय प्रकाशनों में चौथे नंबर पर है, बावजूद इन शोध लेखों का उपयोग नहीं हो रहा है। इसलिए हमें अपने शोध को समाधान मूलक बनाना चाहिए।
विश्व बैंक के उच्च शिक्षा समन्वयक प्रो. फ्रांसिस्को मार्मोल्जो ने कहा कि वर्तमान उच्च शिक्षा ऐसी हो जो विद्यार्थियों में स्व अनुशासित, विश्वसनीय, सत्यनिष्ठ जैसे कौशल विकसित करे। कहा कि उच्च शिक्षा मनुष्य के सुधार का अंतिम अवसर होती है।
हम ज्यादा लोगों को उच्च व गुणवत्ता परक शिक्षा दें, ये हमारा उद्देश्य होना चाहिए। संघ के महासचिव प्रो. फुरकान कमर ने बताया कि देश भर के 858 शिक्षण संस्थानों में 682 संस्थान संघ के सदस्य हैं। जल्द ही आईआईएम भी हमारा सदस्य होगा।