दलितों पर भाजपा का कितना प्रभाव, बताएंगे आईआईटियंस
लोकसभा चुनाव के प्रचार अभियान में तकनीक का बखूबी इस्तेमाल कर माहौल को अपने अपने पक्ष में करने वाली भाजपा अब यूपी विधानसभा चुनाव में भी पुराना फार्मूला अपनाएगी। पार्टी इस काम के लिए आईआईटी प्रोफेसनल्स की सेवा लेगी। दलितों के बीच पार्टी का कितना प्रभाव है, आईआईटियंस सर्वे कर इसका पता लगाएंगे।
अगले साल सूबे में होने वाले चुनाव में भाजपा कोई कोर कसर बाकी रखना नहीं चाहती। दलित वोट बैंक में सेंधमारी के लिए पार्टी ने चक्रव्यूह तैयार किया है। धम्म चेतना यात्रा के बहाने पार्टी दलितों को साधने की कोशिश में है। 14 अक्तूबर को लखनऊ में दलितों की एक विशाल रैली की तैयारी है। इस रैली में पीएम मोदी भी शामिल होंगे। 14 अक्तूबर 1956 को डॉ. अंबेडकर ने 3.65 लाख अनुयायियों के साथ बौद्ध धर्म अपनाया था।
मालूम हो कि 24 अप्रैल को बौद्ध भिक्षुओं ने सारनाथ से गोरखपुर के लिए धम्म चेतना यात्रा निकाली थी। इस यात्रा में भाजपा से जुड़े आईआईटियंस भी शामिल थे। इस यात्रा का उद्देश्य दलितों को मोदी सरकार की रीति-नीति से परिचित कराना था। भाजपा के प्रदेश प्रवक्ता अशोक पांडेय ने बताया कि धम्म चेतना यात्रा को लेकर पार्टी के पास सकारात्मक फीडबैक आया है। अब दस जून को बहराइच से धम्म चेतना यात्रा के दूसरे चरण का आगाज होगा।