वाराणसी की शिवपुर विधानसभा सीट से रिकॉर्ड मतों से जीत हासिल करने वाले अनिल राजभर ने जैसे ही लखनऊ में राज्यमंत्री स्वतंत्र प्रभार के रूप में शपथ ली, शिवपुर से चंदौली के सकलडीहा तक दोबारा शुरू हो गया होली का जश्न। जमकर अबीर-गुलाल उड़े।
पार्टीजनों, समर्थकों ने एक-दूसरे को बधाइयां दीं और मुंह मीठा कराया। सकलडीहा बाजार स्थित आवास पर बुजुर्ग मां ने बेटे की ताजपोशी पर पहले भगवान की पूजा-अर्चना की, फिर पीएम मोदी का आभार जताने के साथ घर आए शुभचिंतकों, परिचितों, पार्टीजनों को मिठाइयां बांटीं।
शिवपुर से विधायक चुने गए अनिल का पैतृक आवास चंदौली के सकलडीहा बाजार में है। शपथ ग्रहण समारोह के दौरान जैसे ही स्वतंत्र प्रभार राज्यमंत्री के रूप में शपथ लेने के लिए अनिल के नाम की घोषणा हुई, टीवी पर टकटकी लगाए परिवारीजन और समर्थक खुशी से उछल पड़े।
पैतृक आवास पर बड़ी संख्या में समर्थक जुटे थे। मां फूला देवी और पत्नी उषा देवी की आंखें खुशी से छलक आईं। घर पर होली जैसा माहौल नजर आया। मां फूला देवी ने कहा कि अनिल ने आज अपने पिता पूर्व विधायक स्वर्गीय रामजीत राजभर के सपनों को पूरा किया है। वह जनता की उम्मीदों को भी पूरा करेंगे।
पत्नी उषा देवी ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, भाजपा अध्यक्ष अमित शाह और पूरी पार्टी के प्रति आभार जताया। कहा कि उनके और उनके पूरे परिवार को जीवन की बड़ी खुशी मिली है। बेेटी प्रज्ञा, श्रेया और बेटा अनिंद भी पिता को मंत्री पद की शपथ लेता देख बेहद खुश थे।
छात्रसंघ अध्यक्ष से राज्यमंत्री तक का सफर
अनिल 1994 में सकलडीहा पीजी कालेज से छात्रसंघ अध्यक्ष का चुनाव जीतने के बाद राजनीति में सक्रिय हुए। वर्ष 2000 में जिला पंचायत सदस्य चुने गए। 2003 में पिता के देहांत के बाद चिरईगांव सीट के उपचुनाव में सपा से उतरे लेकिन हार गए।
2005 में समाजवादी युवजन सभा के प्रदेश अध्यक्ष, 2006 में सपा सरकार में सलाहकार राज्य योजना आयोग की जिम्मेदारी संभाली। लोकसभा चुनाव 2014 से पहले वह समर्थकों के साथ भाजपा में शामिल हुए।
न सिर्फ पहली बार विधायक चुने गए बल्कि राज्यमंत्री स्वतंत्र प्रभार के रूप में ताजपोशी भी हुई। भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह के करीबियों में उन्हें गिना जाता है।