आस्था की नगरी काशी में इस वर्ष होली केवल रंगों का नहीं, बल्कि भक्ति, व्यवस्था और भव्यता का संगम बन गई। बाबा विश्वनाथ के दरबार में उमड़े श्रद्धालुओं ने फूलों और उत्साह के बीच आध्यात्मिक होली का अद्भुत अनुभव किया। वहीं, अन्य मंदिरों में भी अपने आराध्य देव के साथ होली खेलने के लिए भक्त पहुंचे थे।
होली पर काशी विश्वनाथ मंदिर का पूरा परिसर भक्तिरस में सराबोर नजर आया। सुबह से ही देश के विभिन्न राज्यों और विदेशों से आए श्रद्धालुओं की लंबी कतारें लगनी शुरू हो गईं। मंदिर परिसर में गुलाब की पंखुड़ियों की वर्षा के बीच श्रद्धालु बाबा के जयकारों के साथ झूमते दिखाई दिए। ढोल-नगाड़ों और भक्ति गीतों की मधुर ध्वनि से वातावरण शिवमय हो उठा।
श्रद्धालुओं का कहना था कि बाबा के चरणों में होली खेलने का अवसर उनके जीवन का अविस्मरणीय क्षण है। कई परिवार विशेष रूप से इस दिन के लिए काशी पहुंचे थे। मंदिर प्रशासन की ओर से सुरक्षा के व्यापक इंतजाम किए गए थे, जिससे उत्सव शांतिपूर्ण और व्यवस्थित ढंग से संपन्न हो सका।
काशी में इस बार की होली ने आध्यात्मिक उल्लास की नई छटा बिखेर दी, जहां आस्था का अद्भुत संगम देखने को मिला। वहीं, मृत्युंजय महादेव, तिलभांडेश्वर, गौरी केदारेश्वर, बाबा कालभैरव, माता अन्नपूर्णा, विशालाक्षी, दुर्गा मंदिर समेत अन्य मंदिरों में भक्तों ने अबीर-गुलाल चढ़ाकर होली खेली।
रंगोत्सव : बनारसियों संग विदेशी पर्यटकों पर भी चढ़ा काशी की होली का सुरूर
होली पर बुधवार को श्रीकाशी विश्वनाथ धाम से घर की ड्योढ़ी तक रंग, उमंग और उल्लास संग सौहार्द्र, प्रेम और आपसी भाईचारा बांटने में दिन और रात छोटे पड़ गए। गली-मोहल्ले और चट्टी-चौराहों पर बनारसियों संग देसी-विदेश पर्यटकों पर काशी की होली का सुरूर चढ़ा था। कोई भूत-प्रेत बनकर नाचता रहा तो कहीं गीले-सूखे रंगों की बौछार हो रही थी। फाग गीतों में होली के रंग बरस रहे थे। सुबह से ही होलियारों की टोलियां निकलने लगी थीं। 12 बजे तक जमकर होली खेली गई। सड़कों पर हुड़दंग दिखा। महिलाएं और युवतियां भी सार्वजनिक होली का हिस्सा बनीं।
होलियाना मस्ती में चूर रंगबाजों का झुंड चेतगंज, गौदौलिया और अस्सी घाट पर दिखा। डीजे पर होली गीतों की धुनों पर थिरकते-झूमते नजर आए। अस्सी चौराहे पर अड़ीबाजों की जुटान हुई। यहां कपड़ा फाड़ होली खेली गई। सड़कों पर कोई दूल्हा-दुल्हन तो कोई महिला का रूप धरे था तो कोई मुखौटे पहने हुए था।
उधर, वरुणा पार इलाके में भी होली का हुड़दंग दिखा। दशाश्वमेध, कमच्छा, महमूरगंज, तेलियाबाग, लहुराबीर, लंका, सिगरा, रथयात्रा, सुंदरपुर आदि इलाकों में होलीबाजों की टोलियां घूमतीं नजर आईं। वहीं, रेल और बस स्टेशनों पर रुके यात्री बिना किसी झिझक के होली खेलने में मगन थे।
चौरा माता मंदिर में हुआ भव्य शृंगार और महाआरती
ग्राम पंचायत छाहीं स्थित चौरा माता और डीह बाबा मंदिर का ग्रामीणों के सहयोग से भव्य शृंगार किया गया। रात में प्रसिद्ध कलाकारों ने सांस्कृतिक कार्यक्रम प्रस्तुत किया। इस मौके पर पप्पू तिवारी, सर्वेश यादव, दिलीप मौर्या, विश्वनाथ मौजूद रहे।
गांवों में रही होली की धूम
मिर्जामुराद के बेनीपुर, नागेपुर, कल्लीपुर, राजपुर, मेहंदीगंज, अमिनी, करधना, खजुरी व मिर्जामुराद आदि दर्जनों गांवों में होली का महापर्व हर्षोल्लास से मनाया गया। गांव के सैकड़ों महिला, पुरुष व बच्चों ने रंगों में सराबोर होकर पर्व का आनंद उठाया।