विश्व के 35 करोड़ लोग ऐसे हैं, जिन पर एचआईवी का वायरस बेअसर है। सबसे ज्यादा डेढ़ करोड़ लोग अमेरिका में ही हैं।
भारत में ये संख्या लाख तक सीमित है। ऐसे लोग बिना इलाज या दवा के भी एड्स जैसी खतरनाक बीमारी को मात दे सकते हैं। इन्हें एचआईवी से बचाने वाली शक्ति उनके पूर्वजों से ही मिली है।
यूपी कॉलेज के पूर्व छात्र डॉ. मानवेंद्र सिंह ने बीएचयू और अमेरिकी वैज्ञानिकों के साथ मिलकर रिसर्च किया है, जो कि प्रतिष्ठित जर्नल जीनोम बायोलॉजी में प्रकाशित हो चुका है। मुख्य वैज्ञानिक डॉ. मानवेंद्र सिंह ने कहा कि जांच कराएंगे तो एचआईवी का इंफेक्शन मिलेगा। लेकिन इसका कोई असर नहीं होता। दरअसल, ये वायरस खून के प्लाज्मा में ही रह जाता, लेकिन लाल रक्त कणिकाओं में प्रवेश नहीं कर पाता, जिससे एचआईवी का नुकसान नहीं होता।
रिसर्च के मुताबिक, 35 करोड़ लोगों में एचआईवी वायरस के प्रति इम्यूनिटी उनके पूर्वजों से मिले एंडोजेनस रेट्रोवायरस से बनी है। वर्तमान में भी मानव शरीर की कोशिका में इसकी एक हजार कॉपी है। वहीं, डीएनए की 8 हिस्सेदारी है, जो कि काफी बड़ा अमाउंट है।