अदालत ने अपने आदेश में कहा कि प्रार्थना पत्र देने वाली चारों महिलाओं को घटना की पूरी जानकारी है। चारों महिलाएं कोर्ट में साक्ष्य प्रस्तुत कर उसे साबित कर सकती हैं।
इस मामले में कोई ऐसा तथ्य नहीं है जिसकी विवेचना पुलिस से कराने की आवश्यकता हो। ऐसे में चारों महिलाओं के प्रार्थना पत्र को परिवाद के रूप में दर्ज किया जाता है।