महाकुंभ में इसे संतों के सामने रखा गया था। इसमें मंदिर के गर्भगृह में केवल अर्चकों के ही प्रवेश के अधिकार की बात कही गई है। मृतक भोज, जन्मदिन, घर वापसी और दलितों के लिए भी नियम बनाए गए हैं।
उन्होंने बताया कि हिंदू समाज की कुरीतियों के साथ ही विवाह की व्यवस्था के विधान भी तय किए गए हैं। आम जनता के लिए दो पेज की सारांशिका की एक लाख प्रतियां प्रकाशन के लिए तैयार हैं। यह समाज को बांटने वालों के मुंह पर तमाचा होगी क्योंकि इसमें सर्वसमाज को एकजुट करने की बात की गई है।
अखिल भारतीय संत समिति के महामंत्री स्वामी जितेंद्रानंद सरस्वती ने बताया कि अक्तूबर अंत तक सांस्कृतिक संसद में हिंदू आचार संहिता सार्वजनिक की जाएगी। इसे देश भर में एक लाख लोगों तक पहुंचाने का लक्ष्य है।
हिंदू आचार संहिता को तैयार करने के लिए देश भर के धर्मस्थलों पर 40 बार बैठक हुई। मनु स्मृति, पराशर स्मृति और देवल स्मृति को आधार बनाकर स्मृतियों के साथ ही भागवत गीता, रामायण, महाभारत और पुराणों के प्रमुख अंशों को शामिल किया है। 70 विद्वानों की 11 टीम और तीन उप टीम बनाई गई थी। हर टीम में उत्तर और दक्षिण के 5-5 विद्वान थे।
महिलाएं भी करा सकेंगी यज्ञ
काशी विद्वत परिषद के महामंत्री प्रो. रामनारायण द्विवेदी ने बताया कि नई संहिता में कन्या भ्रूण हत्या को पाप बताया गया है। पुरुषों की तरह ही महिलाओं के समान अधिकार की बात की गई है। व्यवस्था है कि महिलाएं भी यज्ञ आदि कर सकेंगी। ।संहिता से आसान होगी घर वापसी की राह : प्रो रामनारायण ने बताया कि हिंदू आचार संहिता में घर वापसी की राह को आसान किया गया है। कोई अगर हिंदू धर्म में वापस आना चाहता है तो उसके लिए सरल पद्धति दी गई है। जो भी ब्राह्मण उनकी शुद्धि कराएगा वह उसे अपना गोत्र देगा।