मौलिकता ही किसी राष्ट्र को विकास के उत्कर्ष पर पहुंचाती है। हजारों सालों से हम ज्ञान परंपरा के मामले में मौलिक थे इसीलिए विश्वगुरु थे, परंतु जबसे हमने अपनी मौलिकता को छोड़कर अनुकरणवादी बने हम पिछड़ते गए। उक्त बातें डॉ. संजय कुमार सिंह, वरिष्ठ राजभाषा अधिकारी, नराकास, बरेका ने कहीं। वह केंद्रीय उच्च तिब्बती शिक्षा संस्थान के राजभाषा कार्यान्वयन समिति द्वारा आयोजित वेबिनार को संबोधित कर रहे थे।
उन्होंने बताया कि हिंदी जनता की भाषा है इसलिए इसे राजभाषा का दर्जा प्राप्त है। हम हिंदी में वैज्ञानिक शब्दावली को अपनाकर और समृद्ध बना सकते हैं। मुख्य वक्ता ओएनजीसी के पूर्व मुख्य प्रबंधक राजभाषा डॉ. बुद्धि नाथ मिश्र ने कहा कि शब्द किसी भाषा का नहीं होता है बल्कि शब्द समाज का होता है। कार्यालयों में उन्हीं शब्दों का प्रयोग करें जो वहां पर प्रचलन में है, उसमें पांडित्य लादने का प्रयास न करें। कार्यक्रम की अध्यक्षता विश्वविद्यालय के कुलसचिव डॉ. आरके उपाध्याय ने की। इस दौरान राजभाषा सदस्य सचिव डॉ अनुराग त्रिपाठी, डॉ. सुशील कुमार सिंह, प्रो. रामसुधार सिंह, राजेश कुमार मिश्र, डॉ. रामजी सिंह, डॉ. हिमांशु पांडेय, सुनील कुमार, एमएल सिंह, भगवान पांडेय आदि मौजूद रहे।