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Varanasi: वाराणसी से जुडे़ हिमाचल प्रदेश कांस्टेबल भर्ती परीक्षा पेपर लीक के तार, UP STF की बड़ी कार्रवाई

Thu, 02 Feb 2023 12:54 PM IST
किरन रौतेला न्यूज डेस्क, अमर उजाला, वाराणसी

सार

हिमाचल प्रदेश की कांस्टेबल भर्ती परीक्षा 27 मार्च 2022 को आयोजित की गई थी। परीक्षा से एक दिन पहले ही पेपर लीक हो गया था। इस मामले में 17 मई 2022 को यूपी एसटीएफ ने जौनपुर के मुजरा कसया के मूल निवासी और अर्दली बाजार के एक अपार्टमेंट में रहने वाले शिव बहादुर सिंह और उसके साथी गाजीपुर के करंडा थाना के खुलासपुर निवासी अखिलेश यादव को वाराणसी के छावनी क्षेत्र से गिरफ्तार किया था।
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पेपर लीक
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विस्तार
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हिमाचल प्रदेश कांस्टेबल भर्ती परीक्षा के पेपर लीक मामले की जांच कर रही सीबीआई चंडीगढ़ की स्पेशल क्राइम ब्रांच ने अर्दली बाजार और विंध्यवासिनी नगर कॉलोनी में छापा मारा। सीबीआई ने सॉल्वर गैंग के सक्रिय सदस्य शिव बहादुर सिंह उर्फ एसबी और उसके दो करीबियों से जुड़े साक्ष्य खंगाले हैं। उच्च पदस्थ सूत्रों के मुताबिक, छापे के दौरान शिव बहादुर व उसके करीबियों और मददगारों के बारे में कई महत्वपूर्ण जानकारी मिली है। कंप्यूटर की हार्डडिस्क सहित तमाम साक्ष्य जब्त करके सीबीआई की टीम ले भी गई है। 

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हिमाचल प्रदेश की कांस्टेबल भर्ती परीक्षा 27 मार्च 2022 को आयोजित की गई थी। परीक्षा से एक दिन पहले ही पेपर लीक हो गया था। इस मामले में 17 मई 2022 को यूपी एसटीएफ ने जौनपुर के मुजरा कसया के मूल निवासी और अर्दली बाजार के एक अपार्टमेंट में रहने वाले शिव बहादुर सिंह और उसके साथी गाजीपुर के करंडा थाना के खुलासपुर निवासी अखिलेश यादव को वाराणसी के छावनी क्षेत्र से गिरफ्तार किया था। इसी मामले में 13 जून 2022 को जौनपुर जिले के केराकत थाना के बीरमपुर के रहने वाले देनदुजय जैसवार उर्फ पिंटू को भी वाराणसी के पुलिस लाइन चौराहा से गिरफ्तार किया गया था। 

प्रतीकात्मक तस्वीर
यूपी एसटीएफ की पूछताछ में शिव बहादुर सिंह ने स्वीकार किया था कि वह अंतरराज्यीय सॉल्वर गैंग के सरगना बेदीराम का करीबी है। तेलंगाना, पंजाब और चंडीगढ़ में आयोजित हुई प्रतियोगी परीक्षाओं के पेपर लीक कराकर उसने लगभग 12 करोड़ रुपये जुटाए हैं। इसी पैसे में से तीन करोड़ रुपये खर्च कर विंध्यवासिनी नगर कॉलोनी में एक मकान खरीदा है। उसी कॉलोनी में 40 लाख रुपये में एक अन्य मकान खरीदने के लिए अनुबंध भी कराया है। शिव बहादुर सिंह ने पूछताछ में यह भी स्वीकार किया था कि गिरोह के सरगना बेदीराम के निर्देश पर ही अखिलेश और देनदुजय उसके लिए काम करते हैं। 

 
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arrest symbol - फोटो : amar ujala
11 अभ्यर्थियों ने दिए थे सात लाख रुपये 
जांच एजेंसियों को शिव बहादुर सिंह ने बताया था कि हिमाचल प्रदेश कांस्टेबल भर्ती परीक्षा का पेपर चंडीगढ़ में 11 अभ्यर्थियों को हल कराया गया था। इसके बदले में उसे और उसकेे दोनों साथियों को गिरफ्तार होने से पहले तक सात लाख रुपये मिले थे। पेपर लीक का खुलासा हो गया और पुलिस ने जालसाजों की धरपकड़ शुरू कर दी तो तीनों वाराणसी भाग आए थे। इसके बाद ठिकाने बदल कर तीनों रह रहे थे।  

कार्रवाई की जद में आ सकते हैं कई और
पुलिस अफसरों ने बताया कि अब इस प्रकरण की जांच सीबीआई की स्पेशल क्राइम ब्रांच कर रही है। इसलिए शिव बहादुर सिंह, अखिलेश और देनदुजय की मुश्किल बढ़ेगी। साथ ही इन सबके संपर्क में रहने वालों पर भी शिकंजा कसेगा। जिसकी भी भूमिका सामने आएगी, वह सभी कार्रवाई की जद में आएंगे।
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