आरटीओ, ट्रैफिक व पुलिस से मिली रिपोर्ट के अनुसार, कुल हादसों में से 65 प्रतिशत मामलों में लोगों की मौके पर ही मौत हो गई। वहीं, 12 प्रतिशत लोगों ने अस्पताल ले जाते वक्त रास्ते में दम तोड़ दिया, जबकि 22 प्रतिशत घायल ऐसे थे जिन्होंने इलाज के दौरान दम तोड़ा। इसमें शराब पीकर वाहन चलाने वालों संख्या ज्यादा है।
क्या बोले अधिकारी
लोगों को राहवीर योजना के बारे में समय-समय पर जागरूक किया जाता है। दुर्घटना वाले क्षेत्रों को चिह्नित कर सुरक्षा पुख्ता की जाएगी। रात में खाली सड़कों की वजह से लोग तेज रफ्तार वाहन चलाते हैं जो दुर्घटना की वजह बनती है। ब्लैक स्पॉट को समाप्त करने के लिए संबिधत विभागों से समन्वय बनाकर योजना तैयार की जा रही, ताकि हादसों को रोका जा सके। -मनोज कुमार वर्मा, आरटीओ प्रवर्तन
दिन की अपेक्षा रात में दुर्घटना के गंभीर मामले इमरजेंसी में ज्यादा आते हैं। रात 11 से दो बजे के बीच ये संख्या ज्यादा रहती है। इमरजेंसी में आने पर तुरंत इलाज किया जाता है। रात में इमरजेंसी में ड्यूटी करने वाली टीम को अलर्ट मोड पर रखा जाता है। वाराणसी ही नहीं आसपास के जिलों से भी बेहतर जांच और इलाज किया जाता है। -डॉ. एनडी शर्मा अपर निदेशक स्वास्थ्य विभाग