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मौत का ‘ब्लैक आवर’: रात 10 से 2 बजे तक सबसे ज्यादा मौत, दो साल में 678 लोगों की गई जान

Wed, 17 Jun 2026 04:43 PM IST
Pragati Chand अमर उजाला नेटवर्क, वाराणसी।

सार

Varanasi News: वाराणसी में पिछले दो साल में सड़कों हादसों ने 678 जिंदगियां छीन लीं। सबसे घातक समय रात के 10 से लेकर भोर में 2 बजे तक का है। 
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Road Accident - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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वाराणसी में पिछले दो साल में सड़कों पर दिन के मुकाबले रात में होने वाले हादसों में मरने वालों की संख्या दोगुनी से भी ज्यादा है। सबसे घातक समय रात के 10 से लेकर भोर में 2 बजे तक का है, जिसे सड़कों का ‘ब्लैक आवर’ कहा जा सकता है। इन चार घंटों में सबसे ज्यादा लोगों ने अपनी जान गंवाई है, जबकि दिन में यह आंकड़ा आधे से भी कम है। दो साल में 678 लोगों ने सड़क हादसों में अपनी जान गंवाई है। 

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राष्ट्रीय राजमार्ग-233 पांडेयपुर- आजमगढ़ मार्ग, बाबतपुर फोरलेन, एनएच-2 वाराणसी चंदौली मार्ग और एनएच-31 वाराणसी गाजीपुर मार्ग, रिंग रोड फेज-1 और फेज-2, हादसों के सबसे बड़े हॉटस्पॉट बनकर उभरे हैं। फ्लाईओवर पर सुरक्षा इंतजामों की कमी और तेज रफ्तार का आलम यह है कि एक साल में फ्लाईओवर से नीचे गिरकर तीन लोग मर चुके हैं।
 
रात में गोल्डन ऑवर की कमी और लापरवाही बनी काल
दिन और रात के हादसों में मौत के आंकड़ों में इतना बड़ा अंतर होने की सबसे बड़ी वजह समय पर इलाज न मिलना है। दिन के समय दुर्घटना होने पर राहगीर या पुलिस तुरंत मदद पहुंचा देती है, जिससे घायल की जान बचने की संभावना बढ़ जाती है। इसके विपरीत, रात में गंभीर हादसों में रिकॉर्ड 99 प्रतिशत मौतें दर्ज की गई हैं। सन्नाटे के कारण दो साल में 36 मामले ऐसे सामने आए, जहां दुर्घटना देर रात हुई, लेकिन लोगों को इसकी जानकारी सुबह हो सकी। 
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आरटीओ, ट्रैफिक व पुलिस से मिली रिपोर्ट के अनुसार, कुल हादसों में से 65 प्रतिशत मामलों में लोगों की मौके पर ही मौत हो गई। वहीं, 12 प्रतिशत लोगों ने अस्पताल ले जाते वक्त रास्ते में दम तोड़ दिया, जबकि 22 प्रतिशत घायल ऐसे थे जिन्होंने इलाज के दौरान दम तोड़ा। इसमें शराब पीकर वाहन चलाने वालों संख्या ज्यादा है।
 
क्या बोले अधिकारी

लोगों को राहवीर योजना के बारे में समय-समय पर जागरूक किया जाता है। दुर्घटना वाले क्षेत्रों को चिह्नित कर सुरक्षा पुख्ता की जाएगी। रात में खाली सड़कों की वजह से लोग तेज रफ्तार वाहन चलाते हैं जो दुर्घटना की वजह बनती है। ब्लैक स्पॉट को समाप्त करने के लिए संबिधत विभागों से समन्वय बनाकर योजना तैयार की जा रही, ताकि हादसों को रोका जा सके। -मनोज कुमार वर्मा, आरटीओ प्रवर्तन

दिन की अपेक्षा रात में दुर्घटना के गंभीर मामले इमरजेंसी में ज्यादा आते हैं। रात 11 से दो बजे के बीच ये संख्या ज्यादा रहती है। इमरजेंसी में आने पर तुरंत इलाज किया जाता है। रात में इमरजेंसी में ड्यूटी करने वाली टीम को अलर्ट मोड पर रखा जाता है। वाराणसी ही नहीं आसपास के जिलों से भी बेहतर जांच और इलाज किया जाता है। -डॉ. एनडी शर्मा अपर निदेशक स्वास्थ्य विभाग

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