आपराधिक घटनाओं में तकनीकी मदद था लक्ष्य
इन कैमरों का उद्देश्य चोरी, लूट, हत्या, छेड़खानी, रंगदारी जैसी घटनाओं की निगरानी करना और पुलिस को जांच में तकनीकी मदद उपलब्ध कराना था। लेकिन कैमरों के बंद होने से यह पूरा तंत्र बेकार साबित हो रहा है। ग्रामीणों का कहना है कि कई घटनाओं का खुलासा कैमरों की मदद से हो सकता था, लेकिन कैमरे केवल शोपीस बनकर रह गए हैं। ग्रामीणों का आरोप है कि कैमरों के रखरखाव और सिम रिचार्ज की व्यवस्था पहले से तय नहीं थी तो इतनी बड़ी राशि खर्च करने का औचित्य क्या था। लोगों ने कैमरों की खरीद, स्थापना और रखरखाव की पूरी प्रक्रिया की निष्पक्ष जांच की मांग की है।
इन ग्राम पंचायतों में लगाए गए थे कैमरे
कैथी, उगापुर, श्रीकंठपुर, बर्थरा, परानापुर, कौवापुर, गौरा उपरवार, चौबेपुर, सिंगुलपुर, बहादुरपुर, मुनारी, नियारडीह, उधोरामपुर, हरदासीपुर, बाबतपुर, रामपुर, रजला, सिंहपुर, लखनपुर, मोहनीडीह, लाखी, बन्तरी, चोलापुर, भरतपुर, मवईया, कपीसा, जगदीशपुर, जरियारी, सुआरी, पहाड़पुर, चंद्रावती, लश्करपुर, भदवा, रसड़ा, सुल्तानीपुर, मोलनापुर सहित कुल 40 ग्राम पंचायतों में सीसीटीवी कैमरे लगाए गए थे।
क्या बोले अधिकारी
मुझे कैमरे लगाए जाने की जानकारी नहीं है। ग्राम प्रधान और सचिव इस संबंध में बेहतर बता सकते हैं। मामले की जानकारी कर कार्रवाई की जाएगी। -आलोक सिन्हा, जिला पंचायत राज अधिकारी
ग्राम पंचायतों द्वारा कैमरे लगाए गए थे। संभव है कि सिम रिचार्ज न होने के कारण कैमरे बंद हुए हों। जांच कराई जाएगी। -शिवनरायन सिंह, खंड विकास अधिकारी, चोलापुर