जौनपुर के खुटहन ब्लाक प्रमुख सरयू देवी के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव के समय हुए बवाल मामले में हाईकोर्ट ने विधायक शैलेंद्र यादव उर्फ ललई की एफआईआर निरस्त करने की मांग को नकार दिया। कहा कि यदि आरोपी आदेश के 30 दिन के भीतर लोअर कोर्ट में उपस्थित होकर जमानत का प्रार्थना पत्र देता है तो कोर्ट घटना की गंभीरता को देखते हुए उसका त्वरित निस्तारण करेगी।
आरोपी प्रथम दृष्टया खुद को निर्दोष साबित करने में सफल रहता है तो उसे अंतरिम जमानत मिल सकती है। महिला दरोगा ने विधायक शैलेंद्र यादव उर्फ ललई और उनके समर्थकों के खिलाफ डकैती और हत्या के प्रयास की धारा में केस दर्ज कराया था।
महिला थाने की थानाध्यक्ष तारावती यादव ने दर्ज प्राथमिकी में कहा था कि 6 नवंबर को खुटहन ब्लाक प्रमुख के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव पर मतदान के दौरान ड्यूटी के लिए वह हमराहियों के साथ ब्लॉक पर जा रही थी। ब्लॉक से पहले ही 50 -60 लोगों ने गाड़ी रोक दी।
उनसे तथा हमराहियों से बदसलूकी की गई। घटना की रिकॉर्डिंग कर रही पुलिसकर्मी शीला यादव का मोबाइल फोन तथा गाड़ी की चाबी जबरन छीन ली गई थी। चिल्लाने पर पीछे से आ रही पुलिस पहुंच गई और उन्होंने ब्लॉक कैंपस में भाग कर जान बचाई।
इस मामले में हाईकोर्ट ने विधायक की एफआईआर निरस्त करने की मांग से इनकार कर दिया है।