अद्भुत, अकल्पनीय और अविश्वसनीय...। कुछ ऐसी ही प्रतिक्रिया रही गंगावतरण देखने वालों की। शुरू से लेकर अंत तक तकनीक की भव्यता से गंगावतरण की प्रस्तुति ने हर किसी को बांधे रखा। मंगलवार की शाम को लालपुर मिनी स्टेडियम का प्रांगण गंगावतरण की मनमोहक प्रस्तुति का गवाह बना। आगे की स्लाइड्स में देखें...
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hema malini
- फोटो : amar ujala
काशी में पहली बार प्रवासी भारतीय सम्मेलन के मंच पर हेमामालिनी को गंगा के स्वरूप में देखकर दर्शक भी आश्चर्य से भर उठे। गंगा के अवतरण से लेकर सतयुग, त्रेता, द्वापर और कलयुग में गंगा की वर्तमान स्थिति को मंच पर हेमामालिनी ने साकार किया।
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- फोटो : amar ujala
मंच पर जैसे ही परदा खुलता है क्षीरसागर में भगवान विष्णु भक्त भगीरथ की पुकार सुनकर विह्वल हो जाते हैं और गंगा को धरती पर जाने का आदेश देते हैं। परदे पर जैसे ही हेमामालिनी का आगमन होता है दर्शकों ने उनका जोरदार स्वागत किया।
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- फोटो : amar ujala
वेगवती गंगा अपने संपूर्ण तेज और आवेग के साथ धरती की ओर बढ़ती हैं। उनके वेग से संपूर्ण ब्रहांड पर प्रलय की स्थिति उत्पन्न हो जाती है। भगवान शिव सृष्टि की रक्षा के लिए गंगा को अपनी जटाओं में बांध लेते हैं।
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- फोटो : amar ujala
ब्रह्मा की विनती पर भगवान शिव गंगा को जटाओं से मुक्त करते हैं। इसके बाद वह भगीरथ के पुरखों को तारते हुए आगे बढ़ती हैं। समय के चक्र के साथ सतयुग, त्रेता और द्वापर के बाद कलयुग में गंगा की दयनीय दशा का मंचन बेहद मार्मिक रहा।
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- फोटो : amar ujala
ऐसी स्थिति उत्पन्न हो जाती है कि गंगा धरती को छोड़कर जाने लगती हैं लेकिन भक्तों की पुकार सुनकर वह फिर रुक जाती हैं। वह कलयुग को श्राप देते हुए कहती हैं कि मैं फिर से निर्मल होकर कलकल बहूंगी।
नृत्य नाटिका का निर्माण और परिकल्पना हेमामालिनी, संगीत पद्यश्री रवींद्र जैन, अशित देसाई, आलाप देसाई, कोरियोग्राफी नीता लूला, गायन सुरेश वाडेकर, कविता कृष्णमूर्ति, शंकर महादेवन, मिका सिंह, रेखा राय, हेमा देसाईं और आलाप देसाई का रहा।